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बनारस के हेरिटेज संरक्षण की कवायद शुरू

नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट ऐंड ऑगमेंटेशन योजना ‘हृदय’ के तहत चयनित बनारस के हेरिटेज संरक्षण की कवायद शुरू हो गई है। शहरी विकास मंत्रलय के हेरिटेज सिटी विभाग के निदेशक शैलेंद्र विक्रम सिंह ने नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी को पत्र भेजकर इससे संबंधित डीपीआर तैयार कराने का निर्देश दिया है। नगर आयुक्त ने संबंधित विभाग को जल्द डीपीआर तैयार कराने को कहा है।

उक्त योजना में बनारस के साथ छह और शहर चयनित किए गए हैं लेकिन प्रथम चरण में मात्र तीन शहरों में काम कराया जाएगा। निदेशक ने नगर आयुक्त से जल्द से जल्द डीपीआर तैयार कर भेजने को कहा है। इसमें पूछा है कि बनारस में सामुदायिक शौचालय, घाट-कुंड और अन्य हेरिटेज स्थल कितने हैं? घाटों और हेरिटेज क्षेत्र में  पानी कहां से आता है और कैसे रिचार्ज होता है? इन क्षेत्रों में साफ-सफाई और घाट-कुंडों की साफ-सफाई की क्या व्यवस्था है? क्या कहीं 24 घंटे सफाई की व्यवस्था लागू है? घाट-कुंडों और हेरिटेज स्थलों के प्रकाश की क्या व्यवस्था है? इन क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबिल करने के लिए क्या करना होगा? इसकी कितनी जरूरत है? इन सबसे जुड़ी जानकारी के साथ एक विस्तृत प्लान जल्द से जल्द मंत्रलय को भेजा जाए। नगर आयुक्त ने कहा कि इस पर हमने काफी काम किया है, हम जल्द ही डीपीआर बनवाकर भिजवा देंगे।

हेरिटेज सेल का हो गठन
इस योजना के तहत नगर निगम ने 22 अक्तूबर को मंत्रलय को आठ पन्ने का प्रस्ताव भेजा था। इसमें हेरिटेज सेल के गठन की मांग की गई है। नगर निगम के अर्बन प्लानर अतुल गौतम ने बताया कि इसमें विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। ताकि हेरिटेज डाक्यूमेंटशन और मैपिंग का काम पूरा किया जा सके। इससे प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग भी कर सकेंगे।

12 घाटों की भेजी सूची
नगर निगम ने प्रस्ताव दिया है कि अस्सी, तुलसी, चेतसिंह किला, शिवाला, हनुमान, केदार, मानमंदिर, ललिता, मीरघाट, सिंधिया, पंचगंगा और भोसले घाटों को पायलट प्रोजेक्ट में ले सकते हैं। इनकी बिल्डिं़ग को संरक्षित किया जा सकता है। यहां पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं बैठने, कपड़े बदलने, पेयजल, शौचालय हो। चेतसिंह किले का विकास सिटी हाल के रूप में कर सकते हैं।

गोदौलिया-दशाश्वमेध का विकास
यह भी प्रस्तावित किया गया है कि गोदौलिया से दशाश्वमेध क्षेत्र तक को एक नये डिजाइन से विकसित किया जाए। इस क्षेत्र में लोगों के पैदल चलने पर जोर हो। घाट तक गाड़ी एक खास समय में ही जा सकेगी। घाट के पास एक स्टेज हो, जहां कोई भी कार्यक्रम हो सकें। इस क्षेत्र में पर्यटक सूचना केंद्र भी हो। इस तरह जनता के लिए आकर्षक बाजार होगा। सारनाथ को सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में विकास करने का भी प्रस्ताव है।

दिल्ली हाट की तर्ज पर अस्सी का विकास
नगर निगम ने ये भी प्रस्ताव दिया है कि दिल्ली हाट की तर्ज पर अस्सी क्षेत्र का विकास किया जाए। यहां घाटों को भी आकर्षक बनाया जाए। मैदागिन से अस्सी का क्षेत्र भी बहुत पुराना है। यहां की बिल्डिंग भी बहुत पुरानी है। इसे संरक्षित किया जाए। इस क्षेत्र को स्ट्रीट कीपिंग मार्केट के रूप में विकसित किया जाए। इससे पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा समय तक बनारस में रोकना संभव होगा।

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  • Web Title:बनारस के हेरिटेज संरक्षण की कवायद शुरू