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बच्चा नहीं करेगा कोई शिकायत

बच्चा नहीं करेगा कोई शिकायत

कामकाजी मां हमेशा एक अपराधबोध में जिंदगी जीती है। बच्चे को पर्याप्त समय न दे पाने की कसक उसे हमेशा परेशान करती है। कभी-कभी यह कसक बच्चे के साथ उसके रिश्ते को कमजोर भी बनाती है। कैसे इस अपराधबोध से बाहर निकलें, बता रही हैं सीमा झा

समय की पाबंद बनें
घर, ऑफिस, परिवार और बच्चे के बीच में संतुलन बनाना कोई हंसी-खेल नहीं है। जब ऑफिस जाना ही है तो क्यों न खुशी-खुशी जाया जाए। बजाय इसके कि ऑफिस में घर के सौ काम याद आएं या फिर घर में ऑफिस का काम लाने की जरूरत पड़े। ऐसा न हो, इसके लिए समय की सख्त पाबंद बनें। मसलन, समय पर सोना, जागना व हर काम को टालने के बजाय वक्त पर कर लेना। यह आदत खुद में ही नहीं, बल्कि बच्चे व पति में भी विकसित करें।  

मदद मांगने में बुराई नहीं
कई महिलाओं की आदत होती है कि वह सारा काम खुद करना पसंद करती हैं। अगर आप में भी यही आदत है तो इसे फौरन बदल डालें।  जाहिर सी बात है कि जब खुद ही सारा काम करते-करते थक जाएंगी तो भला अपने लाडले को वक्त कैसे दे पाएंगी? इसके लिए कई छोटे-मोटे व हल्के-फुल्के काम में पति की मदद ली जा सकती है। इसी तरह से छोटे-मोटे सामान को अपने जगह पर रखने में बच्चों की मदद की मदद ली जा सकती है।

हेल्पर रखें
यदि संभव हो तो फुल टाइम कामवाली घर में रखने में कोई बुराई नहीं हैं। इससे आपका बहुत समय बचेगा। यानी सुबह का नाश्ता बनाने से लेकर रात का खाना बनाने तक और वह कीमती वक्त आप अपने बच्चे के साथ बिता पाएंगी। पर, ध्यान रखें कि कामवाली रखने का मतलब बेफिक्र हो जाना नहीं है। उसकी गतिविधियों पर हमेशा अपनी नजर रखें। 

बच्चें को विश्वास में लें
आपकी मजबूरी को तो आपके पति व अन्य घरवाले फिर भी समझ जाते हैं, नहीं समझ पाते हैं तो बच्चे। इसके लिए उन्हें बताएं कि ऑफिस आप उनके बेहतर भविष्य के लिए जाती हैं ताकि वे अच्छे स्कूल में पढ़ सकें। उसके पास भी वह तमाम साधन मौजूद हों, जो उसके अन्य दोस्तों के पास है। अगर आप घर में ही रहेंगी और ऑफिस नहीं जाएंगी तो उसे यह तमाम चीजें नहीं मिल पाएंगी। लेकिन ध्यान रखें कि आपका समझाने का यह तरीका सकारात्मक हो ताकि बच्चे आपकी बातों को सही तरीके से समझें।

टेक्नोलॉजी से करें दोस्ती
जमाना बेहद तेजी से चल रहा है, ऐसे में अगर आप धीरे-धीरे चलेंगी तो पीछे छूट जाएंगी। अपने रोजमार्रा के कामों को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद लीजिए। मसलन कई सारे बिल की पेमेंट आप ऑनलाइन कर सकती है। बच्चों की फीस ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। कई स्कूलों में अब पीटीएम भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए होने लगी है। ऐसे में आपको अपने लाडले के पीटीएम में न जा पाने का कोई अफसोस नहीं
सताएगा। टेक्नोलॉजी की मदद लेने का एक फायदा यह भी होगा कि आप अपना कीमती वक्त बचा पाएंगी और उस वक्त का इस्तेमाल बच्चे के साथ अच्छा वक्त बिताने में कर पाएंगी।

अपराधबोध न पालें
आप नौकरी अपने घर की बेहतरी के लिए कर रही हैं। फिर चाहे वह बच्चे के स्कूल की महंगी फीस की भरपाई के लिए हो या मकान की किस्त अदायगी के लिए। इसके लिए परिवार के किसी जरूरी आयोजन में शामिल न हो पाने या बच्चे और पति को पर्याप्त वक्त न दे पाने का मलाल मन में न पालें। मन में अपराध बोध के पलते रहने से आप कभी खुश नहीं रह पाएंगी  और इसका सीधा असर आपके घर से लेकर आपके ऑफिस के कामों पर भी पड़ेगा। अच्छा होगा कि मन ही मन घुटने की बजाय पति से मन की बातें शेयर करें।

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