DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खानाबदोश जातियां मुख्य धारा से जुड़ेंगी

ाानाबदोश जनजातियों को आज तक इस देश में कोई पहचान नहीं मिल सकी है। इन जनजातियों की संख्या देश में लगभग 10 करोड़ है लेकिन इनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। ये लोग खुले मैदान, मंदिर अथवा रलवे लाइनों के किनार रहते हैं। इन लोगों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति आयोग का गठन किया है। यह आयोग देश भर में घूम कर इन जनजातियों के बार में जानकारी जुटा रहा है। जुलाई के अंत तक आयोग केन्द्र सरकार को रिपोर्ट सौंप देगा। यह जानकारी आयोग के अध्यक्ष बालकृष्ण रणके और सदस्य लक्ष्मण भाई के. पटनी ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि देश में पांच सौ से अधिक खानाबदोश जनजातियां हैं। 260 से अधिक जनजातियों से आयोग मिल चुका है। आजादी से पहले इन्हें जन्मना अपराधी मानते हुए क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट बनाया गया था। इस एक्ट को आजादी के बाद खत्म किया गया लेकिन इन जनजातियों के लिए कुछ नहीं किया गया। राशन कार्ड मिलने और बीपीएल सूची में शामिल होने की बात तो दूर इन्हें मतदान का भी अधिकार नहीं है। ये विशुद्ध भारतीय संस्कृति के लोग हैं और कलाओं के सहार जीवन यापन करते हैं। लेकिन आजादी के बाद कई तरह के कानून बनाकर इनकी कलाएं इनसे छीन ली गई हैं और ये भोजन जुटाने के लिए भीख मांगने अथवा चोरी करने के लिए विवश हैं। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम जसे कानूनों के कारण ये लोग जानवरों के खेल भी नहीं दिखा पाते हैं। उन्होंने माना कि बिहार सरकार में इन जनजातियों को लेकर संवेदनशीलता तो दिखाई पड़ी है लेकिन इनके लिए महादलितों से अलग कुछ खास किए जाने की जरूरत है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: खानाबदोश जातियां मुख्य धारा से जुड़ेंगी