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माछिल फर्जी मुठभेड़ मामला: सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद

माछिल फर्जी मुठभेड़ मामला: सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद

सेना ने माछिल फर्जी मुठभेड़ मामले में दो अधिकारियों सहित अपने सात कर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह जानकारी दी है। जम्मू कश्मीर के माछिल में 2010 में हुई इस फर्जी मुठभेड़ में तीन युवक मारे गए थे।
   
उमर ने आज एक ट्वीट में कहा, सेना ने 2010 में माछिल में हुई फर्जी मुठभेड़ के मामले में कमांडिंग अफसर सहित सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह वास्तव में एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।
   
उमर ने जनरल कोर्ट मार्शल के फैसले की सराहना करते हुए ट्विटर पर कहा, यह एक ऐतिहासिक क्षण है। कश्मीर में कभी भी किसी ने नहीं सोचा था कि इस तरह के मामलों में न्याय होगा। संस्थाओं से विश्वास उठ गया था।

उमर ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि अब हमें फिर कभी माछिल जैसी घटनाएं देखने को नहीं मिलेंगी और यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो इस तरह की कोशिश करते हैं। हालांकि नई दिल्ली में सेना के सूत्रों ने कहा कि केवल पांच कर्मियों को सजा सुनाई गई है और पुष्टि प्रक्रिया जारी है।
   
कोर्ट मार्शल की कार्यवाही इस साल जनवरी में शुरू हुई थी और यह सितंबर में पूरी हुई थी। अप्रैल 2010 में सेना ने कहा था कि उसने माछिल सेक्टर में तीन घुसपैठियों को मार डाला जो पाकिस्तानी आतंकवादी थे। इन लोगों की पहचान बाद में शहजाद अहमद खान, रियाज अहमद लोन और मोहम्मद शफी लोन के रूप में हुई थी। ये तीनों बारामूला जिले के निवासी थे।
   
मारे गए लोगों के परिजनों ने दावा किया था कि सेना तीनों युवकों को नौकरी और धन का प्रलोभन देकर सीमावर्ती क्षेत्र में ले गई थी और बाद में उन्हें आतंकवादी बताकर मार डाला। घटना के चलते कश्मीर घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जो 2010 में अक्तूबर के मध्य तक चले थे। माछिल घटना के बाद के पांच महीनों में सेना की कार्रवाई में करीब 120 लोग मारे गए थे।

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  • Web Title:माछिल फर्जी मुठभेड़ मामला: सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद