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गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य घोषित

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-15 पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित कर दिया है। पिछले साल के बराबर ही गन्ना मूल्य घोषित किया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में गन्ना मूल्य सामान्य प्रजाति के लिए 280 रुपए प्रति कुंतल, अगैती प्रजाति के लिए 290 रुपए प्रति कुंतल और अनउपयुक्त प्रजाति के लिए 275 रुपए प्रति कुंतल घोषित करने का फैसला लिया गया।

पिछले साल भी यही गन्ना मूल्य था।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राहुल भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि चीनी मिलों को गन्ना प्राप्त करने के 14 दिन के अंदर 240 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से पहली किस्त के रूप में किसानों को भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित 14 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया तो बकाया में 15 फीसदी ब्याज जुड़ जाएगी। पेराई बंद करने के तीन माह के अंदर किसानों को गन्ना मूल्य के बकाया की दूसरी किस्त 40 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों को भुगतान करनी होगी।


चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और चीनी के कम मूल्य को देखते हुए राज्य सरकार ने इस 40 रुपए में 20 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से चीनी मिलों को सहायता देने का फैसला लिया है। जबकि 20 रुपए चीनी मिलों को अपनी ओर से देने होंगे। राज्य सरकार अपनी ओर से जो 20 रुपए की सहायता देगी, उसमें 6 रुपए 60 पैसे सोसायटी को दिए जाने वाले कमीशन की प्रतिपूर्ति के रूप में देगी। दो रुपए प्रति कुंतल क्रय कर के रूप में देगी। चीनी पर लगने वाले दो रुपए 80 पैसे प्रति कुंतल प्रवेश कर के रूप में छूट देगी। यह कुल मिलाकर 11 रुपए 40 पैसे बैठता है। बचे हुए आठ रुपए साठ पैसे प्रति कुंतल के हिसाब से राज्य सरकार प्रतिपूर्ति करेगी।


कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि यदि पहली अक्तूबर 2014 से 31 मई 2015 तक चीनी के रेट 3100 रुपए प्रति कुंतल, शीरे के रेट 390 रुपए, बगास का रेट 167 रुपए और प्रेस मड का रेट 26 रुपए प्रति कुंतल है तो शेष बीस रुपए चीनी मिलें किसानों को भुगतान करेंगी। साथ ही राज्य सरकार आठ रुपए साठ पैसे प्रति कुंतल के हिसाब से अतिरिक्त सहायता देगी। लेकिन चीनी का रेट 3100 रुपए से ज्यादा रहता है तो राज्य सरकार आठ रुपए साठ पैसे प्रति कुंतल के हिसाब से चीनी मिलों को अतिरिक्त सहायता नहीं देगी। 

चीनी का रेट 3100 रुपए से कम रहता है तो चीनी मिलों द्वारा दिए जाने वाले अपने हिस्से के बीस रुपए में से भी राज्य सरकार उसी हिसाब से कितनी प्रतिपूर्ति करे, इस पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी विचार करके फैसला करेगी।


प्रमुख सचिव गन्ना विकास और चीनी उद्योग ने एक सवाल के जवाब में बताया कि ढुलाई आठ रुपए 75 पैसे कुंतल ही रहेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले बकाया पर ब्याज के बारे में गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी निर्णय करेगी। उन्होंने बताया कि आज तक 90.5 फीसदी बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो चुका है। अभी 1850 करोड़ रुपए का बकाया है। जबकि जून में यह बकाया सात हजार करोड़ से ज्यादा था।


उन्होंने कहा कि छह हजार सात सौ लाख कुंतल गन्ना पेराई का अनुमान है। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि ये सभी फैसले किसानों के हित में लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के हित में ही उत्पादकता बढ़ाने की योजना शुरू की गई है जिसमें बीज अनुदान आदि की व्यवस्था है। नवम्बर के अन्त तक 80 प्रतिशत चीनी मिलें चालू हो जाएंगी।

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