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चुनाव खर्च में जुड़ेगी कार्यकर्ताओं की भी कीमत

चुनाव खर्च को लेकर निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन सख्ती अब कार्यकर्ताओं की कीमत तय होने तक पहुंच गई है। मगर राजनीतिक दल इससे सहमत नहीं हैं और वे इसका विरोध निर्वाचन आयोग से करने जा रहे हैं। ताजा मामला जिला प्रशासन के द्वारा चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले सामग्रियों की लिस्ट का है। इसमें कुछ प्रचार सामग्रियों की दर को लेकर तो दलों को आपत्ति है ही, कार्यकर्ताओं का रेट तय करने से भी उनमें खासी नाराजगी है।

बीते सप्ताह राजनीतिक दलों के साथ हुई थी बैठक
चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने बीते सप्ताह राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक की थी। इसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दो पेज की एक लिस्ट थमाई गई थी। इस लिस्ट में कुल 25 आइटम हैं। मगर अधिक प्रतिक्रिया काउंटिंग एजेंटों को एक दिन का 250 रुपये और मोटरसाइकिल रैली में शामिल कार्यकर्ताओं के लिए हजार रुपए तय करने पर हुई है। दलीय प्रतिनिधियों के विरोध के बाद मोटरसाइकिल वाले कार्यकर्ताओं की दर 500 रुपये करने पर जिला प्रशासन सहमत बताया जाता है। मगर काउंटिंग एजेंटों की दर को लेकर प्रशासन का रुख नहीं बदला है। प्रतिक्रिया इसी बात को लेकर है।

हमारे प्रत्याशी आयोग से शिकायत करेंगे: कमल किशोर
भाजपा प्रतिनिधि कमल किशोर ने कहा है कि हम इसकी लिखित शिकायत चुनाव आयोग से करने जा रहे हैं। मैंने जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिम के प्रत्याशियों को इसकी सूचना दे दी है। उन्होंने कहा है कि नामांकन के बाद वे आयोग से लिखित शिकायत करेंगे। हमरा कहना है कि मोटरसाइकिल कार्यकर्ता की होती है। तेल भी वही भराते हैं। ऐसे में उन्हें किराया देने की बात कहां से उठती है। हमने बैठक में भी इस प्रस्ताव का विरोध किया था। यह अव्यावहारिक रेट है। सूची पर कोई पत्रांक या दिनांक दर्ज नहीं है। इससे स्पष्ट है कि यह रेट चार्ट खुद जिला प्रशासन ने तैयार किया है।

रेट का सभी दलों ने विरोध किया है: फिरोज
झाविमो के जिला अध्यक्ष फिरोज खान का कहना है कि हमने जिला प्रशासन की रेट का बैठक में विरोध किया था। हम मानते हैं कि कार्यकर्ता न तो हमसे पैसा मांगते हैं और न हम उन्हें कोई भुगतान करते हैं। ऐसे में कार्यक्रमों में मोटरसाइकिल लेकर आने वाले कार्यकर्ताओं को भुगतान करने का सवाल कहां उठता है? यह अनावश्यक और अव्यावहारिक है। इस पर प्रशासन और चुनाव आयोग को फिर से विचार करने की जरूरत है। वैसे हमारे विरोध का ही असर था कि उपायुक्त ने मोटरसाइकिल वाले कार्यकर्ताओं की दर हजार के बजाय पांच सौ करने की बात कही है।

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