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कितनी पुरानी है हमारी आकाशगंगा

कितनी पुरानी है हमारी आकाशगंगा

आज हम बात करते हैं अपनी गैलेक्सी यानी आकाशगंगा की। तुम बिल्कुल सही समझे, हम मिल्की वे की ही बात कर रहे हैं, जिसे मंदाकिनी भी कहते हैं। आखिर इसी मिल्की वे में तो हमारा सौरमंडल भी है और हमारे सौरमंडल जैसे करोड़ों और सौरमंडल भी हैं। तुम्हें ये तो मालूम ही है कि हमारे सौरमंडल का केन्द्र यानी सूर्य भी एक तारा है, जिसके चारों ओर हमारी पृथ्वी और अन्य ग्रह, उपग्रह आदि चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे छोटे-बड़े अरबों तारों, गैस और धूलकणों से मिलकर बनी है आकाशगंगा। ब्रह्मांड में तरह-तरह की आकाशगंगाएं हैं, जिनमें हमारी आकाशगंगा स्पाइरल है। इसके केन्द्र को गैलेक्टिक सेंटर कहते हैं। कई दूधिया छल्लेदार भुजाएं नदियों की तरह इस सेंटर से निकलती हुई लगती हैं। इसी कारण इसे मिल्की वे यानी क्षीर मार्ग भी कहते हैं।

इसकी विशालता का तो तुम्हें अंदाजा है ही। हमारी आकाशगंगा किसी बैलगाड़ी के पहिए की तरह दिखती है, जिसके एक छोर से दूसरे छोर की दूरी या उसका व्यास एक लाख प्रकाश वर्ष से अधिक है। यानी प्रकाश की किरण एक लाख वर्ष में जितनी दूरी तय करती है, हमारी आकाशगंगा की एक छोर से दूसरे छोर की दूरी उतनी ही है। हमारी आकाशगंगा की त्रिज्या (रेडियस) लगभग 50 हजार प्रकाश वर्ष है, लेकिन हमारा सौरमंडल आकाशगंगा के केन्द्र से लगभग 30 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। पहिए की धुरी की तरह बीच में इसकी मोटाई एक हजार प्रकाशवर्ष से अधिक है। तुम्हें ये तो मालूम ही है कि हर रोज लगभग 24 घंटे बाद सूर्योदय होता है। यानी धरती अपनी कक्षा की दूरी को 24 घंटे में पूरा कर लेती है। धरती की औसत गति लगभग एक हजार मील प्रति घंटा मानी जाती है। लेकिन हमारा सूर्य आकाशगंगा के केन्द्र का चक्कर पांच लाख मील प्रतिघंटे की रफ्तार से लगा रहा है। इतनी तेज गति के बावजूद सूर्य को एक चक्कर करके वापस अपनी जगह पहुंचने में 20 करोड़ साल लग जाते हैं। तुम्हें यह जानकार और भी आश्चर्य होगा कि सूर्य ने अपने जीवन में अब तक आकाशगंगा के केन्द्र के 25 चक्कर भी पूरे नहीं किए है।

अनुमान है कि हमारी आकाशगंगा में 100 अरब से अधिक तारे हैं। आकाशगंगा के केन्द्र से 40 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी तक चारों तरफ तारों का घनत्व ज्यादा है। उसके बाद यह घनत्व काफी कम हो गया है। इसकी कई भुजाओं के कारण ही तो इसे स्पाइरल श्रेणी की आकाशगंगा कहा जाता है। इसकी भुजाओं में चार प्रमुख हैं और दो छोटी भुजाएं हैं। नीले रंग की भुजा को परसीयस कहा जाता है। जामुनी रंग की भुजा को नोरमा और बाहरी भुजा भी कहते हैं। हरे रंग की भुजा को स्कूटम-सेन्टॉरस और गुलाबी रंग की भुजा को कैरीना टेरियस भुजा कहा जाता है। दो छोटी भुजाओं में एक का नाम ओरायन सिग्नस है, जो नारंगी रंग की है। इसी भुजा में हमारा सौरमंडल है।

इसके जन्म के बारे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह 13 अरब वर्ष से अधिक पुराना है। 2007 में एचई 1523-0901 नाम के एक तारे की आयु 13.2 अरब वर्ष अनुमानित की गई, जिससे माना जा रहा है कि हमारी आकाशगंगा इतने वर्ष की हो गई है।

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