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आधे सांसद तय समय में नहीं चुन सके आदर्श गांव

आधे सांसद तय समय में नहीं चुन सके आदर्श गांव

सांसदों के आदर्श गांव चुनने के लिहाज से मंगलवार आखिरी दिन था। इस दौरान देश के आधे से ज्यादा सांसद (कुल 793 में से करीब 463) अपना गांव नहीं चुन सके। इसे देखते हुए केंद्र ने गांव चुनने की समयसीमा एक हफ्ते बढ़ा दी है।

जल्द गांव चुनने का अनुरोध : कई सांसदों ने बताया कि वे गांव चुनने की प्रक्रिया में हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बचे हुए सांसदों से भी अनुरोध किया है कि वे जल्द गांव चुनकर सूचना केंद्र सरकार को भेजें। गांव चुनने वालों में ज्यादातर भाजपा सांसद हैं। लेकिन केरल समेत कुछ राज्यों में गैर भाजपा दलों के सांसदों ने भी रुचि दिखाई है।

आखिरी दो दिनों में इजाफा : ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि दो दिन पहले तक करीब 80 सांसदों ने ही गांव का चुनाव करने की सूचना दी थी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के वाराणसी में गांव का चुनाव करने के बाद सांसदों ने तेजी दिखाई है।

झारखंड से सिर्फ दो : झारखंड में शिबू सोरेन और एक अन्य सांसद ने गांवों का चुनाव किया है। गुजरात में 26 में से 21 लोकसभा सांसद और 11 में से पांच राज्यसभा सांसदों ने गांव चुना है। छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सांसदों में से केवल एक ने गांव चुना है। केरल के 20 लोकसभा सांसदों ने गांव का चुनाव करके इसकी सूचना भेज दी है। उधर, तमिलनाडु के 39 में से सिर्फ 9 लोकसभा सांसदों ने गांव चुना है।

270 लोकसभा और 59 राज्यसभा सांसदों ने गांव चुन लिए हैं।

आंध्र और प.बंगाल रहे फिसड्डी
आंध्र प्रदेश में सिर्फ केंद्रीय मंत्री अशोक गणपति राजू ने गांव चुना है। प. बंगाल में 42 में से एक सांसद ने गांव चुना।

यूपी, बिहार और उत्तराखंड के सांसद गांव चयन में आगे
आदर्श ग्राम चयन के लिए तय तारीख 11 नवंबर तक ज्यादातर सांसदों ने विकास के लिए गांव का चयन कर लिया है। बिहार, यूपी और उत्तराखंड के 90 फीसदी सांसदों ने अपनी सूची प्रशासन को सौंप दी है। गांवों में अच्छे दिन लाने का उत्साह इस कदर है कि कई सांसदों ने अपने गोद लिए गांवों का दौरा कर विकास की योजनाएं भी बनानी शुरू कर दी है।

इस मामले में अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांसद आगे रहे जिन्होंने अपने गांवों का ऐलान कर योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं। ऐसे भी सांसद हैं जिन्होंने एक से ज्यादा गांवों को गोद लिया। कई राज्यसभा सदस्यों ने भी गांव चुन लिए हैं तो सपा के नरेश अग्रवाल और झामुमो के सुप्रीमो शिबू सोरेन भी मोदी के इस अभियान से जुडम् गए हैं।

बिहार के 36 सांसदों ने चुने गांव : बिहार से लोकसभा के 40 सांसदों में से 38 सांसदों ने आदर्श ग्राम का चयन कर इसकी सूचना प्रशासन को भेज दी है। जिन दो सांसदों ने गांव चयन की सूचना नहीं भेजी है इनमें  रामकृपाल यादव ( पटना, भाजपा) और  मोहम्मद तसलीमुद्दीन ( अररिया, राजद ), राजकुमार सिंह (भाजपा, आरा) और बुलो मंडल ( राजद, भागलपुर) शामिल हैं। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाह ने नासरीगंज ब्लॉक के अमियावर गांव का चयन किया है। केंद्रीय मंत्री बने गिरिराज सिंह ने खनवां गांव गोद लिया है जो राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जन्मस्थली है। ज्यादातर सांसदों ने गांव के चयन में विकास के पैमाने पर पिछड़ापन को तरजीह दी है।

तीन गांव लिए गोद : उन्नाव से भाजपा सांसद सच्चिदानंद हरि साक्षी महराज ने तीन गांवों को गोद लिया है। बरेली के सांसद संतोष गंगवार ने तीन गांवों को गोद लिया है।

ये रहे सबसे आगे : बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान और  देवरिया ते सांसद कलराज मिश्र ने भी योजना के लांच के साथ ही गांव चुन लिए थे। गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ ने योजना के ऐलान के अगले दिन गांव चुन कर चौपाल लगा दी।

शुरू कर दिया काम  : सलेमपुर के सांसद रवींद्र कुशवाहा ने रेवती ब्लाक के नक्सल प्रभावित कुसहर ग्राम को गोद लेने के बाद गांव जाकर विकास पर चर्चा भी की। वहीं श्रावस्ती के सांसद दद्दन मिश्र भी चयनिनत गांव में दो बार जा चुके हैं।

नफा नुकसान का रखा ख्याल
कई सांसदों ने अति पिछड़े गांव चुनकर विकास को तरजीह दी तो कुछ ने राजनीतिक नफा-नुकसान देख कर गांव चुने। कुछ सांसदों ने कोई खतरा न उठाते हुए पहले से ही विकसित गांवों को चुन लिए। चयन करने में सांसदों ने अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई।

उमा ने पैतृक गांव ही चुना
झांसी की सांसद उमा भारती ने अपने पैतृक गांव सडम्कोरा को गोद लिया है। हालांकि प्रधानमंत्री का निर्देश था कि पैतृक या ससुराल के गांव गोद नहीं लिए जाएंगे लेकिन सुश्री भारती का कहना है कि अन्य गांवों के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जोशी को नहीं मिला गांव

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी अभी तक गांव नहीं चुन पाए हैं। उनके निर्देश पर एक टीम भाजपा के जिला अध्यक्ष कुछ गांवों का सर्वे करेंगे। इसकी रिपोर्ट जोशी के सामने रखी जाएगी।

प्रशासन ने रद्द किया प्रस्ताव
फतेहपुर की सांसद साध्वी निरंजना ज्योति ने यमुना कटरी क्षेत्र के चांदपुर ग्राम सभा का चयन किया था लेकिन इस गांव में थाना, ओवरहेड टैंक समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण प्रशासन ने प्रस्ताव रद्द कर दिया। सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल द्वारा चयनित गांव सतपुरा रिजेक्ट हो गया, क्योंकि यह मजरा (टोला) था।

विरोधी दलों के सांसदों ने भी चुने गांव
कन्नौज की सांसद और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने सैदपुर सकरी गांव को गोद लिया  है, जबकि सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने हरदोई में सधई बेहटा गांव को चुना है। वहीं जदयू के शरद यादव (राज्यसभा) ने पिछड़े गांव बालमगढ़िया को चुना है। दुमका के झामुमो सांसद शिबू सोरेन ने अति पिछड़ा रांगा पंचायत को गोद लिया है।

सोनिया और राहुल की सूची नहीं मिली
रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी और अमेठी के सांसद राहुल गांधी की ओर किसी गांव के चयन की सूचना प्रशासन के पास नहीं है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि योजना की गाइड लाइन स्पष्ट न होने से गांव गोद लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। वहीं जिलाधिकारी का कहना है कि गांवों की सूची सांसद को भेजी जा चुकी है।

मुलायम ने नहीं लिया गोद
आजमगढ़ के सांसद और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने गांव नहीं चुना है। बदायूं के सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी कोई गांव नहीं चुना है।

राधा का गांव गोद लिया हेमा ने
मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने राधा जी की जन्मस्थली के रूप में विख्यात रावल गांव को गोद लिया है। गांव में राधाजी का प्राचीन मंदिर भी है। 

राजनाथ ने अति पिछड़ा बेतीं गांव चुना
केंद्रीय गृह मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह ने सरोजनीनगर ब्लॉक की बेंती ग्राम पंचायत को आदर्श ग्राम के रूप में चुना है। बेंती में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। दवा के लिए छह से 15 किलोमीटर तक चल कर जाना पड़ता है। पंचायत के रामगढ़ी मजरे में बिजली भी नहीं पहुंची है।
 
सत्यपाल ने अति विकसित गांव को लिया गोद
बागपत के भाजपा सांसद सतपाल सिंह ने पलडी गांव को चुना है। यहां भाजपा को सर्वाधिक वोट मिले थे पर यह गांव पिछड़ा नहीं है। यहां इंटर कालेज, पुस्तकालय, डाकघर, खेल मैदान, स्वास्थ्य केंद्र, संपर्क सड़क है। गांव से 11 लोग विदेशों में वैज्ञानिक 39 इंजीनियर, 19 एमबीबीएस हैं। सैकड़ों लोग शिक्षा, पुलिस सेवा और सेना में हैं।

झारखंड में चुनाव बाद चयन
झारखंड में 14 सांसद हैं जिनमें से दो ने गांव चुन लिए हैं। विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण ज्यादातर सांसदों ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू है इसलिए गांव का चयन नहीं हुआ है। चुनाव बाद यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

उत्तराखंड के 5 सांसदों ने चुना गांव
उत्तराखंड से लोकसभा के पांच और राज्यसभा के दो सांसद हैं। मंगलवार शाम तक सात में पांच सांसद गांव गोद ले चुके हैं। भुवन चन्द्र खंडूड़ी और तरुण विजय ने अभी कोई गांव गोद नहीं लिया है।

एनसीआर में चुने ऐतिहासिक गांव
फरीदाबाद के सांसद कृष्णपाल गुर्जर ने तिलपत गांव का चयन किया है। इस गांव को महाकवि सूरदास की कर्मस्थली माना जाता है। गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत ने बोलनी गांव का चयन किया है। यहां लालू प्रसाद के बेटी का विवाह हुआ है। राव इंद्रजीत बताते हैं- 900 साल पुराना पिछड़ा गांव है। यहां विकास के काम कराए जाएंगे। सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक ने सबसे ज्यादा वोट दिलाने वाले दातौली गांव का चयन किया है। यह गांव भी 225 साल पुराना है।

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