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सीबीआई कोर्ट ने 26 साल पुराने मामले में सुनाई सजा

सीबीआई विशेष अदालत ने मंगलवार को डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) इंजीनियर को पत्नी और डेढ़ साल की बेटी की हत्या में उम्र कैद की सजा सुनाई। मामले में अदालत ने इंजीनियर को सोमवार को दोषी ठहराया था। इंजीनियर पर अलग-अलग धाराओं में आठ हजार रुपये अर्थदंड भी कोर्ट ने लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने इंजीनियर को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

चार धाम यात्रा के बहाने पत्नी और बच्चाों समेत गंगोत्री धाम पहुंचे डीडीए के इंजीनियर सेवाराम गोयल निवासी मुनीरका दिल्ली ने 22 जून 1988 को भैरोंघाटी के पास पत्नी सरोजबाला व डेढ़ साल की बच्चाी मीनू को धक्का दे दिया था। मामले को कई दिनों तक षड्यंत्र के तहत छिपाए रखने के बाद सरोजबाला के भाई सुभाषचंद्र गुप्ता ने सुप्रीर्म कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद 30 जुलाई 1988 को सीबीआई के पास मुकदमा आया। जिसमें इंजीनियर सेवाराम तथा उनके पिता सत्यानारायण गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। 26 साल से यह मामला सीबीआई कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने सोमवार को मामले में आरोपी सेवाराम को दोषी करार दिया था। मंगलवार को सीबीआई विशेष न्यायाधीश अमित कुमार सिरोई की अदालत में सजा सुनाई गयी। कोर्ट में पेश हुए 16 गवाह और 36 महत्वपूर्ण दस्तावेज के बाद डीडीए इंजीनियर सेवाराम गोयल को धारा 302 में आजीवन कारावास, पांच हजार रुपये अर्थदंड और धारा 201 में दो साल की सजा, तीन हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर आरोपी को तीन माह अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। इधर न्यायालय में सजा सुनाने के बाद पुलिस ने सेवाराम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

सजा के बाद सहज दिखा आरोपी
सेवाराम के चेहरे पर सजा के बाद जरा सी भी सिकन नहीं थी। खुली कोर्ट में सजा सुनने के बाद सेवाराम सहज दिखा। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार करके जेल भेजने की तैयारी कर रही थी तो वह बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा था। हाथ में पूरे प्रकरण की फाइल पकड़े सेवाराम को देखकर नहीं लग रहा था कि उसे इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद कोई बड़ी सजा मिली होगी।

सीबीआई ने खूब बहाया पसीना
सेवाराम को पत्नी पर परपुरुष के साथ संबंध रखने का शक था। बस इसी वजह से सेवाराम गोयल ने शादी के चार साल बाद पत्नी को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी। मामले में जो रणनीति सेवाराम ने रची, उसका खुलासा करने में सीबीआई को भी पसीना बहाना पड़ा। लेकिन पुख्ता सबूत और गवाह मिलने के बाद सेवाराम को आखिर पत्नी और मासूम बच्चाी की हत्या में सजा मिल गयी। अभियोजना अधिकारी पंकज गुप्ता ने बताया कि सबूत और गवाह जुटाने के लिए सीबीआई ने दिल्ली से लेकर उत्तरकाशी तक के चक्कर काटे। जबकि मामले में गायब हुए महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाने में भी मशाक्कत की गयी। उन्होंने बताया कि पुलिस की ढील से मामले में निर्णय पर देरी हुई है। इधर कोर्ट के इस निर्णय के बाद सुभाषचंद्र गुप्ता के परिजनों के चेहरों पर जीत की खुशी दिखी।

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