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एएमयू के कुलपति ने विवाद के लिए मीडिया को दोषी ठहराया

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति एवं अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने लाइब्रेरी में छात्राओं को प्रवेश से रोके जाने के मुद्दे पर छिड़े विवाद के लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि उनके एक वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर सनसनीखेज तरीके से पेश किया गया, जिससे उनकी महिला विरोधी छवि बनाई जा सके। एएमयू एक धर्मनिरपेक्ष संस्था है और यहां लैंगिक आधार पर भी कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।

श्री शाह मंगलवार को यहां क्लार्क अवध होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। वे मंगलवार को यहां राज्यपाल राम नाईक से भी मिले। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी परिसर स्थित मौलाना आजाद लाइब्रेरी में परास्नातक के छात्र-छात्रओं के कारण ही काफी भीड़ रहती है। वहां बैठने के लिए एक सीट भी खाली नहीं होती। परिसर से तीन किलोमीटर दूर स्थित अब्दुल्ला गल्र्स कॉलेज की स्नातक की लगभग चार हजार छात्रओं ने उनसे इस लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने की इजाजत मांगी थी। उन्होंने केवल इस आधार पर उन छात्रओं की यह मांग नहीं मानी थी कि लाइब्रेरी में सीट का अभाव है।
 
इसके अलावा वह गल्र्स कॉलेज यूनिवर्सिटी परिसर से दूर भी है। वहां से यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में आने-जाने पर छात्रओं की सुरक्षा का पहलू भी चिन्ता का विषय बन जाता है। ऐसे में गल्र्स कॉलेज की केवल स्नातक की छात्रओं को ही इसकी अनुमति नहीं दी गई है।

लेफ्टिेनेंट जनरल शाह ने कहा कि मौलाना आजाद लाइब्रेरी की किताबें ऑनलाइन उपलब्ध हैं। अब्दुल्ला गल्र्स कॉलेज की स्नातक की छात्रओं को इस सुविधा का लाभ उठाने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि छात्रओं के साथ यूनिवर्सिटी में किसी भी स्तर पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।

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