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स्वच्छता अभियान यानी झाड़ पर झाड़ू फेरना

झाड़ू-विमर्श, झाड़ूगर्दी, झाड़ू-चिंतन, झाड़ू-संवाद, झाड़ू-सेमिनार, झाड़ू-सिंपोजियम, चाहे कुछ भी कह लें, मगर अब झाड़ू पर व्यापक बातचीत की जरूरत है, क्योंकि झाड़ू अब नेता चला रहे हैं। झाड़ू तक कांप रही है कि हाय, किनके हाथों में आ फंसी। एक सीन देखें। कोई नेता झाड़ू लगाने के लिए पहले झाड़ू-स्थल पर किसी कचरा-बॉक्स का कचरा गिराए, फिर उस पर झाड़ू चलाए। यह हरकत नेता को ही शोभा दे सकती है। मगर इस सबको कोई कैमरे में रिकॉर्ड करके मीडिया में चला दे, तो मामला झाड़ू पर झाड़ू फेरने का हो जाता है। ऐसे पकड़े जाने पर किसी भी नेता को कहना चाहिए कि पहले कूड़ा गिराकर हम बताने की कोशिश कर रहे थे कि ऐसे कूड़ा नहीं गिराना चाहिए। फिर झाड़ू चलाकर यह दिखा रहे थे कि ऐसे झाड़ू चलानी चाहिए।

झाड़ू कैसे चलाई जाए, इसे लेकर अभी कोई किताब बाजार में नहीं आई है। मेरा अंदाज है कि जरूर कोई उद्यमी लेखक हाऊ टू चलाओ झाड़ू, लर्न स्वच्छता इन टू ऑवर्स टाइप किताबें लिखकर भाजपा के किसी अधिवेशन-स्थल के बाहर बेचना शुरू कर देगा।
झाड़ू-चालन के कुछ सूत्र इस प्रकार हैं-
झाड़ू चलाते समय कभी मीडिया को आमंत्रित नहीं करना चाहिए, वह कूड़ा गिराने के फोटू भी खेंच लेता है। झाड़ू-कांड में सिर्फ अपने कैमरामैन से फोटू खिंचवाने चाहिए। झाड़ू-कांड में लगी महिला-नेत्रियों को ताकीद है कि झाड़ूबाजी विजुअल होनी चाहिए। तस्वीरें वही छपेंगी, जो छपने के बाद अच्छी, फोटोजेनिक, सुंदर दिखें। ड्रेस, झुमके, बिंदी का कलर झाड़ू से मैच करे, तो बेहतर रहेगा। (मोबाइल के कलर को झाड़ू के कलर से मैच न कराएं, यह कुछ ज्यादा हो जाएगा।) झाड़ू चलाते समय नीचे के कूड़े पर नहीं देखना चाहिए। कूड़े को देखने से झाड़ूबाजी का फोटू खराब हो सकता है। झाड़ू चले या न चले, आपकी निगाह कैमरे पर होनी चाहिए, स्माइलिंग- ब्यूटीफुल, कूल आदि। महत्वपूर्ण कूड़ा नहीं है, झाड़ू भी नहीं है, महत्वपूर्ण अखबार में छपी आपकी झाड़ूबाजी की तस्वीर है।

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  • Web Title:स्वच्छता अभियान यानी झाड़ पर झाड़ू फेरना