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सवाल साख का

एक तरफ उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीश के चयन के लिए बनी कॉलेजियम व्यवस्था के विरोध के बीच सरकार द्वारा नई व्यवस्था बना दी गई है, वहीं दूसरी ओर, जिला जज बनने के लिए संविधान में वर्णित प्रक्रिया (अनुच्छेद-233)  का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हो रहा है। अनुच्छेद-233 के तहत वही व्यक्ति जिला जज हो सकता है, जो कम से कम 07 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में नहीं हो, परंतु पिछले पांच-सात साल का इतिहास यदि देखा जाए, तो यही मिलेगा कि जिसने न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने की बजाय घर में बैठकर परीक्षा की तैयारी की है, वही व्यक्ति जिला जज बन पाया है। फलत: वैसे जजों में प्रैक्टिकल अनुभव का घोर अभाव होता है तथा वे छोटे-छोटे आवेदनों की सुनवाई में भी काफी समय लेते हैं। न्यायालय का काफी सारा समय मूल वाद की सुनवाई की जगह आवेदन की सुनवाई में ही बरबाद हो जाता है, जो न्यायपालिका की साख को गिरा रहा है। अत: सरकार को समय रहते जिला जज की चयन प्रणाली को बदलना होगा, नहीं तो लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती ही जाएगी और न्यायपालिका की साख घटती जाएगी।
दिलीप कुमार, मुजफ्फरपुर, बिहार

धर्म का मतलब

हम भारतीयों की मनोवृत्ति समझ से परे है। हम धार्मिक अनुष्ठानों में आंडबरों पर जितना विश्वास करते हैं, उतना विश्वास अपने कर्तव्यों के निर्वाह में रखें, तो पूरे देश का उद्धार हो जाए। हम धर्म के ब्रह्म रूप को अपनाने में अपना कर्तव्य समझते हैं, धर्म में निहित तत्व को नहीं अपनाते हैं। अपने कर्तव्य कर्म के प्रति सजग नहीं रहते। शिक्षक का धर्म पढ़ाना है और विद्यार्थी का धर्म मन लगाकर पढ़ना है। दुकानदार का धर्म सही माप-तोल, शुद्धता, भाव के साथ सामान को बेचना है। सही व्यवहार सभी वर्गों का धर्म है। लेकिन पूरी उम्र निकल जाती है और हम आडंबर व झूठ-फरेब का साथ नहीं छोड़ते हैं।
शिव प्रकाश शर्मा, हापुड़, उत्तर प्रदेश

आवश्यक शर्त

विकसित राष्ट्र के लिए सबसे आवश्यक शर्त है कि देश के प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्रभक्ति कूट-कूटकर भरी होनी चाहिए, जबकि इस देश के नागरिकों में जातीयता कूट-कूटकर भरी हुई है। जाति के नाम पर गलत बात-गलत हाथ को लोग संरक्षण और मदद करते हैं। साथ ही, जाति के आधार पर कार्य संपादन किए जाते हैं। शीर्ष प्रबंधन में बैठे लोग, चाहे वे केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कार्यरत हों, जाति के आधार के बिना कार्य नहीं करते। ऐसे में, आप या हम ये कैसे कह सकते हैं कि यह देश विकसित राष्ट्र बनेगा? दूसरी बड़ी बात है कि हम भ्रष्ट आचरण से बाज नहीं आ रहे हैं, जो विकसित राष्ट्र बनने की राह में बड़ी बाधा है। अत: भ्रष्टाचार व जातिगत भेदभाव खत्म करके ही हम विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
राज, बोध गया

पाकिस्तान को दें जवाब

भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद नियंत्रण रेखा का पाकिस्तान सम्मान नहीं करता है। आतंकियों की घुसपैठ कराकर, सरहद से सटे गांवों और रिहाइशी बस्तियों पर अकारण गोलाबारी कर पाकिस्तान मर्यादा का उल्लंघन करता आया है। ऐसे में, वहां के निवासी सामान्य जिंदगी नहीं जी पा रहे हैं। इनके बावजूद हमारी चुप्पी समझ से बाहर है। हर बार जनता सब्र का घूंट पीकर रह जाती है कि शायद सरकार अबकी बार असरदार जवाबी कार्रवाई करे, मगर अंत में निराशा ही हाथ लगती है। उम्मीद तो यही थी कि मोदी सरकार का खौफ पाकिस्तान के सिर चढ़कर बोलेगा और वह सीमा पर अपनी शैतानी हरकतों से बाज आएगा, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से पाकिस्तान और अधिक उग्र हो गया है। ऐसे में, मोदी सरकार को तमाम मसले किनारे रखकर पाकिस्तान नाम की समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए।
अक्षित तिलक राज गुप्ता, रादौर, हरियाणा

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