DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अजन्मी बच्चियों की आवाज बनेंगी मूर्तियां

अजन्मी बच्चियों की आवाज बनेंगी मूर्तियां

मैक्सिको के एनाहुयाकेली संग्रहालय में चीन की गुमनाम बेटियों पर चल रही ‘टेराकोटा बेटियां’ प्रदर्शनी सबका ध्यान खींच रही है। ये चीन की वो बेटियां हैं, जो इस देश की ‘एक संतान नीति’ की भेंट चढ़ा दी गईं।

बेटों की चाह ने इन्हें दुनिया में आने ही नहीं दिया गया, मगर टेराकोटा सिपाहियों की तरह ये किसी राजा की सुरक्षा करने नहीं बल्कि, दुनिया के सामने अपने देश में बेटियों की दयनीय स्थिति दिखाने निकली हैं।

चीन में लड़के और लड़की के लिंगानुपात में भारी अंतर है। दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले इस देश में 2030 में स्थिति भयावह स्तर तक पहुंच जाएगी। चीनी समाज शास्त्रियों की मानें, तो इस साल यहां पुरुषों की संख्या महिलाओं के मुकाबले काफी अधिक होगी।

इस स्थिति का अनुमान 2010 के जनगणना आंकड़ों से लगाया जा सकता है। चीन में 2010 में पुरुषों की आबादी महिलाओं के मुकाबले 3.4 करोड़ अधिक थी। चीन की टेराकोटा बेटियां अगले साल यानी 2015 को अपने देश पहुंचेंगी और फिर टेराकोटा सिपाहियों की तरह दफना दी जाएंगी।

इन्हें 15 साल बाद 2030 में फिर निकाला जाएगा, जब यहां लैंगिक असमानता सर्वोच्च स्तर पर होगी। देखा जाए तो 15 साल की अवधि में एक बच्ची किशोरी हो जाती है। यह गुमनाम बच्चियां भी इस दौरान बड़ी हो चुकी होंगी, मगर हकीकत में नहीं सिर्फ कहानी में।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अजन्मी बच्चियों की आवाज बनेंगी मूर्तियां