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दस में से छह प्रताडित पुरुष पत्नी को सताते हैं

दस में से छह प्रताडित पुरुष पत्नी को सताते हैं

संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बचपन में भेदभाव के शिकार या आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे देश के करीब 60 फीसदी पुरुष, पत्नी या महिला साथी को प्रताडित करते हैं। इस रिपोर्ट को सोमवार को जारी किया गया।

संयुक्त राष्ट्र विश्व जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने यह अध्ययन वाशिंगटन स्थित ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वुमेन’ के साथ मिलकर किया है। इस शोध में भारत के सात राज्यों के 9205 पुरुषों को शामिल किया गया था। ताकि यह समझा जा सके कि आखिर महिलाओं के प्रति अपराध और बेटे की चाह की असली वजह क्या है। अध्ययनकर्ताओं ने प्रताडित शब्द को परिभाषित करते हुए इसमें उन सभी गतिविधियों को शामिल किया गया था, जिसमें महिला भावनात्मक रूप से आहत होती या फिर उसे शारीरिक नुकसान पहुंचता है। साथ ही महिलाओं को उनकी इच्छा के अनुरूप काम या नौकरी करने की इजाजत नहीं देने को भी शोषण की श्रेणी में रखा गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि आर्थिक तंगी के दौर से गुजरने वाले पुरुष महिलाओं के प्रति अधिक हिंसक होते हैं, क्योंकि मान्यता के अनुरूप परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनकी होती है। लेकिन इसमें नाकामयाब होने पर वे कुंठा का शिकार हो जाते हैं वे अपनी कुंठा पत्नी को प्रताडित कर प्रकट करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि बचपन में भेदभाव के शिकार पुरुष महिलाओं के प्रति सामान्य से चार गुना अधिक हिंसक होते हैं।

आधी महिलाएं शारीरिक हिंसा का शिकार
अध्ययन के दूसरे हिस्से में इन राज्यों की 3,158 महिलाओं को शामिल किया। शोध में शामिल 52 फीसदी महिलाओं ने कहा कि वे शारीरिक हिंसा का सामना कर चुकी हैं। शोध में शामिल 38 फीसदी महिलाओं के मुताबिक उनके पति ने उन्हें थप्पड़ मारा या जलाया है। बचपन में भेदभाव की शिकार महिलाओं के हिंसा का शिकार होने की आशंका सामान्य से तीन से छह गुना तक अधिक होती है।

आंकड़े भी करते तसदीक
3,09,546 अपराध महिलाओं के खिलाफ दर्ज किए वर्ष 2013 में
1,18,866 अपराध इनमें से पत्नियों के प्रति क्रूरता के थे

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