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एसोशिएशन खुद इस नियम को हटा दे तो बेहतर

एसोशिएशन खुद इस नियम को हटा दे तो बेहतर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉलीवुड में महिला मेकअप आर्टिस्ट पर लगी रोक हटाते हुए कहा कि हम 2014 में हैं, 1935 में नहीं। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिने कास्टय़ूम मेकअप आर्टिस्ट एंड हयर ड्रेसर्स एसोसिएशन (सीसीएमएए) खुद इस नियम को हटा दें तो बेहतर होगा।

याचिकाकर्ता चारू खुराना ने इसी एसोसिएशन के नियमों को चुनौती दी थी। इसके नियमों में फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ पुरुषों को ही मेकअप आर्टिस्ट बनने का अधिकार दिया गया था।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भी इस नियम को हटाने के लिए एसोसिएशन से कहा था, लेकिन एसोसिएशन ने सरकार का कहना नहीं माना।

एसोसिएशन का तर्क
1955 में स्थापित एसोसिएशन का कहना था कि उस समय महिला मेकअप आर्टिस्ट नहीं थीं। इसलिए नियमों में भी पुरुष मेकअप आर्टिस्टों को तरजीह दी गई। लेकिन इस को संतुलित करने के लिए हेयर ड्रेसर का काम महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया।

चोरी छुपे करते थे काम
एसोसिएशन के अधिकारियों को छापे डालने के दौरान कलाकारों के वैन में जाने की इजाजत नहीं होती। इसका फायदा उठाकर महिला मेकअप आर्टिस्ट चोरी-छिपे मेकअप का काम करती थीं। अगर कभी जांच की नौबत आ भी जाती थी, तो वे हेयर ड्रेसर का कार्ड इस्तेमाल करती थी।

पांच साल के संघर्ष का मिला फल
चारु ने
पुलिस से भेदभाव की शिकायत की पर कोई फायदा नहीं हुआ
इस मामले को उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष उठाया
2009 में चारु तमिल फिल्म में मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करने के दौरान धमकाया
2013 में महिला आयोग ने चारु की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की
हजार का जुर्माना एसोसिएशन ने लगाया अवैध तरीके से काम करने के लिए
10 नवंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को असंवैधानिक करार दिया

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