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पुलिस वालों को ट्रेनिंग में वेतन 2008 से ही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस वालों को वर्ष 2008 से ट्रेनिंग के दौरान वेतन देने के शासनादेश को वैध ठहराया है। साथ ही उससे पहले प्रशिक्षण अवधि में स्टाइपेंड देने के वर्ष 2002 के शासनादेश को निरस्त करने का एकल पीठ का आदेश रद कर दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड एवं न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 2008 से पहले ट्रेनिंग करने करने वाले पुलिसकर्मी स्टाइपेंड के ही हकदार हैं।

कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। पुलिसवालों ने प्रशिक्षण अवधि में स्टाइपेंड देने के शासनादेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी। एकल पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि प्रशिक्षण के दौरान केवल स्टाइपेंड देना कानून व नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

साथ ही शासनादेश को रद करते हुए 2002 से प्रशिक्षण अवधि में वेतन देने का निर्देश दिया था। विशेष अपील में राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि प्रशिक्षणरत कर्मचारियों को स्टाइपेंड देने का फैसला सरकार का नीतिगत मुद्दा है, जिसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार की यह नीति विभेदकारी नहीं है और सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू है।

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