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मनरेगा घोटालाः सीबीआई साठ जिलों में दर्ज करेगी एफआईआर

सीबीआई ने मनरेगा घोटाले की जांच अब जोरशोर से शुरू कर दी है। दूसरे चरण में पांच जिलों वाराणसी, मथुरा, प्रतापगढ़, बांदा और महाराजगंज में हुए घोटाले की प्रारंभिक जांच दर्ज कर पड़ताल शुरू की गयी है। जल्द ही इन जिलों के तत्कालीन डीएम और सीडीओ से पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा। सीबीआई बाकी बचे साठ जिलों में भी क्रमबद्ध तरीके से एफआईआर दर्ज करेगी।

हाईकोर्ट के आदेश पर बसपा शासनकाल में हुए मनरेगा घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने 21 फरवरी को सात जिलों गोण्डा, बलरामपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कुशीनगर, संतकबीरनगर और महोबा में हुए घोटाले की एफआईआर दर्ज की थी। तफ्तीश के दौरान सीबीआई कई स्थानों पर छापे मार चुकी है और हाईकोर्ट लागातार मामलों की निगरानी कर रही है।

सीबीआई के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि तफ्तीश के दौरान पाया गया है कि पांच अन्य जिलों प्रतापगढ़, महाराजगंज, मथुरा, बांदा और वाराणसी में भी घोटाला हुआ है। सीबीआई ने इस संबंध में प्रारंभिक जांच दर्ज कर पड़ताल शुरू की है। सभी जिलों से सीबीआई ने वहां वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा में हुए सभी कार्यो का ब्योरा मांगा है। साथ ही ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से भी मनरेगा के तहत कराए गए निर्माण के दस्तावेज और कार्यो का ब्योरा देने को कहा है।

सीबीआई के मुताबिक, प्रारंभिक छानबीन में ही सभी जिलों में गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई है। संबंधित जिलों के तत्कालीन सीडीओ और जिलाधिकारियों व जिला पंचायत अधिकारियों को जल्द ही सिलसिलेवार ढंग से नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

संपत्तियों की भी पड़ताल करेगी सीबीआई 
सीबीआई ने कहा है कि जांच के दायरे में आए सरकारी कर्मचारियों की जो भी संपत्तियां सामने आएंगी, उनके बारे में जांच की जाएगी। जांच में देखा जाएगा कि ये संपत्तियां कब और कैसे किस धन से अर्जित की गईं? अगर पाया गया कि संपत्तियां घोटाले की अवधि में और घोटाले से कमाई गई काली कमाई से दर्ज की गईं तो कार्रवाई होगी।

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