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व्यर्थ के विचार

मन कभी खाली नहीं रहना चाहता। सही विचार न हो, तो व्यर्थ विचार चुपके से आकर व्यक्ति को बेचैन कर देते हैं। ये हमें अतीत की ओर ले जाते हैं और हमें पुरानी बातें याद करवा कर हममें यह पछतावा पैदा करते हैं कि काश हमने वह नहीं किया होता। ये हमें भविष्य की ओर ले जाते हैं, जहां तरह-तरह की कल्पनाएं, नाकामियों की आशंकाएं, अनहोनी का डर बना रहता है। इन विचारों में नकारात्मकता होती है। ये हमें डराते हैं, हमारे अंदर अपराध बोध, चिंता जैसे भाव पैदा करते हैं। खाली दिमाग को घेरकर ये हम पर राज करते हैं। इनमें सच्चाई नहीं होती, पर इनमें खोकर हम अपनों और अपने मित्रों से दूर होते जाते हैं।

ऐसे विचारों से खुद को बचाया कैसे जाए? हमारा मन अगर इन्हीं में डूबा रहेगा, तो हम हर समय संघर्ष व गुस्से से भरे रहेंगे और बिना समझे अन्य से कड़वा बोलेंगे। एक ही उपाय है कि मन को खाली न छोड़कर सही सोच से भरे रहें। जीवन में अच्छी-बुरी बातें होती रहती हैं। बुरी बातों के बारे में सोचकर मन को उद्विग्न करने की जगह जो कुछ अच्छा हुआ है, उसके बारे में सोचें और मन को खुश रखें। किसी की गलत बात याद आए, तो फौरन उसकी किसी अच्छी बात को याद करने की कोशिश करें। जब यह विचार परेशान करे कि काश मैंने अपने प्रियजन के साथ यह न किया होता, तो फौरन वह बात याद करें, जो आप जानते हैं कि उन्हें खुशी देने वाली रही होगी। हर बार हमें अपने किए हुए काम या कही हुई बात को बदलने का मौका नहीं मिलता। एक गलत बात की जगह दस ठीक बातें कही गईं, इसे याद करने से हमारे मन में शांति आएगी, और फिर व्यर्थ के नकारात्मक विचारों को जगह नहीं मिलेगी। बार-बार के अभ्यास से उनको विदा होना ही पड़ेगा और हमारा मन शांत हो जाएगा।

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