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चंदनकियारी विधानसभा में 1995 से नहीं खिला कमल

जिले के चंदनकियारी विधानसभा में दो दशक से कमल निशान को जीत नहीं मिली है। इस चुनाव में भी भाजपा-आजसू गठबंधन में चंदनकियारी सीट आजसू की झोली में चली गई है। जिसके कारण भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं में मायूसी है। भाजपा के नेता-कार्यकर्ता अन्य दलों से जुड़ रहे हैं। 2000 में भाजपा ने पूर्व विधायक गौर हरिजन को प्रत्याशी बनाया जरूर था, परंतु अपेक्षित जन समर्थन न मिलने के कारण श्री हरिजन पराजित हुए।

जानकारों की मानें तो 1995 के चुनाव में गौर हरिजन का भाजपा का टिकट वापस करना और अन्य प्रत्याशी को टिकट मिलने पर उसके द्वारा नामांकन नहीं कर पाना और 2000 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को बहुत कम मत मिलने के कारण भाजपा प्रदेश कमेटी और सेंट्रल कमेटी ने मान लिया कि चंदनकियारी में संगठन चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। इसी कारण गठबंधन का निर्णय लिया गया जो आजतक जारी है। उस चुनाव में पूर्व विधायक हारू रजवार ने समरेश समर्थित प्रत्याशी सतीश रजक को पराजित कर चंदनकियारी सीट पर कब्जा जमाया था।

तब से अब तक यह सीट गठबंधन के खाते में ही जा रही है। 1990,1995 और 2000 में गौर हरिजन को मिला था कमल निशान1990 में गौर हरिजन को पहली बार कमल निशान मिला था। भाजपा के टिकट पर ही गौर हरिजन ने हारू रजवार को पराजित कर चंदनकियारी सीट पर कब्जा किया था। उसके बाद से अब तक चंदनकियारी सीट पर नहीं खिल पाया है। 1995 में गौर हरिजन को दुबारा भाजपा से टिकट मिला था, परंतु कमल निशान पर चुनाव लड़ने से उनके इनकार के बाद दपु दास को भाजपा प्रत्याशी बनाया गया।

लेकिन नामांकन में गड़बड़ी के कारण श्री दास चुनाव लड़ने से वंचित रह गए। तभी गौर हरिजन ने एसकेडी के सिंबल पर चुनाव लड़कर हारू रजवार को मात्र 174 मतों से पराजित किया था। 2005 और 2009 में भी गठबंधन खातें में चंदनकियारी सीट चला गया। 2005 में गठबंधन के तहत गौर बाउरी को और 2009 में हारू रजवार को जदयू से प्रत्याशी बनाया गया था। 2005 में झामुमो के हारू रजवार ने वर्तमान विधायक उमाकांत रजक को पराजित कर सीट पर कब्जा जमाया था।

2009 में हारू रजवार झामुमो का टिकट न मिलने पर जदयूप्रत्याशी बने थे और भाजपा का भी समर्थन था। लेकिन आजसू प्रत्याशी उमाकांत रजक ने सबको पछाड़ते हुए चंदनकियारी सीट पर कब्जा जमाया। इस चुनाव में अमर बाउरी उमाकांत के निकटतम प्रतिद्वद्वी बने, जबकि श्रीरजवार तीसरे नंबर पर रहे। 2014 में गठबंधन के तहत आजसू को मिला सीटभाजपा-आजसू में चुनावी गठबंधन होने और चंदनकियारी सीट आजसू के खाते में जाने से वर्तमान विधायक उमाकांत रजक का आजसू प्रत्याशी होना तय माना जा रहा है।

चंदनकियारी सीट पर कब्जा बनाए रखने के लिए श्री रजक लगातर जनसंपर्क में जुटे हैं। 1990 में समरेश सिंह बोकारो से और चंदनकियारी से गौर हरिजन भाजपा प्रत्याशी थे। तभी दोनों सीटों पर कमल खिला था। समरेश सिंह के भाजपा छोड़ने पर उन्हीं के साथ मिलकर गौर हरिजन ने1995 में एसकेडी से चुनाव लड़कर जीता था।

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  • Web Title:चंदनकियारी विधानसभा में 1995 से नहीं खिला कमल