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राष्ट्रीय खेल घोटाले में सरकारी गवाह बने कलमाडी

निगरानी ने भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाडी से सोमवार को ढाई घंटे तक पूछताछ की। रांची में आयोजित 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले में उनकी क्या भूमिका है इस बिंदु पर अनुसंधानक एएसपी आनंद जोसफ तिग्गा ने पूछताछ की। कलमाडी के सामने 34 सवाल रखे गए थे। पूछताछ की रिकार्डिंग और वीडियोग्राफी कराई गई है।

सोमवार की सुबह दिल्ली से अधिवक्ता के साथ कलमाडी रांची पहुंचे। वह 12 बजे दिन में निगरानी ब्यूरो के कार्यालय पहुंचे। साढ़े तीन बजे वह लौट गए। कलमाडी को निगरानी थाना कांड संख्या 49/10 (जो भोलानाथ सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था) में सरकारी गवाह बनाया गया है। इस मामले में आइओए के निदेशक एसबी प्रसाद से भी पूछताछ होनी है। उन्होंने निगरानी के अधिकारियों को लिखित सूचना दी है कि हार्ट का ऑपरेशन होने के कारण वह रांची नहीं आ पा रहे हैं।

क्या है आरोप
कलमाडी पर आरोप है कि झारखंड में वर्ष 2011 में आयोजित राष्ट्रीय खेल के लिए सामग्री की खरीद में उन्होंने गलत आदेश दिए। झारखंड ओलंपिक संघ की ओर से एक पत्र कलमाडी को लिखा गया था। इसमें लिखा गया था कि संघ ओमेगा कंपनी से खेल सामग्री की खरीद करना चाहता है। इस पत्र पर उन्होंने सहमति दी थी। निदेशक एसबी प्रसाद और कलमाडी के हस्ताक्षर से यह पत्र झारखंड ओलंपिक संघ को मिला था और और भारी कमीशन के आधार पर घटिया सामग्री की आपूर्ति कराई गई।

कलमाडी से यह भी पूछा गया कि उस समय वह राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त नेता थे। रांची में सर्किट हाउस में रहने और खाने की व्यवस्था थी, तो वह कैपिटोल हिल होटल में क्यों रुकते थे। उनके रहने और खाने पर 10 लाख से अधिक का खर्च है। उनसे यह भी पूछा गया कि यहां जब खेल में गड़बड़ी हो रही थी, तो इसकी जानकारी उन्हें थी या नहीं। उनका जवाब था कि ओमेगा कंपनी से सामग्री खरीदने का आदेश उनकी ओर से जरूर दिया गया था, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि सामग्री की आपूर्ति के लिए यहां पहले से टेंडर हो चुका था, जिसे रद्द नहीं किया गया था। इस तथ्य को झारखंड को अधिकारियों ने छिपाया था।

दो अधिकारी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में झारखंड ओलंपिक संघ के सचिव एसएम हासमी और पूर्व खेल निदेशक और आइएफएस अधिकारी पीसी मिश्र गिरफ्तार हो चुके हैं। दो अन्य नामजद अभियुक्त कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक और अध्यक्ष आरके आनंद पर भी शिकंजा कस सकता है।

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