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पटना पुस्तक मेले में पुरानी कृतियों की ज्यादा मांग

आधुनिक समय में भले ही पाठक नए लेखकों की पुस्तकों में रुचि ले रहे हों, लेकिन पटना के गांधी मैदान में चल रहे 21वें पटना पुस्तक मेले में पुरानी प्रसिद्घ रचनाएं मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं। पुस्तक मेले में महान रचनाकारों की कृतियां खूब बिक रही हैं।

कहा जाता है कि अच्छी कृतियां कभी नहीं मरतीं, उसके शब्द अमर होते हैं। रचनाकार भले ही गुजर गए हों, परंतु उनकी रचनाएं अमर रहती हैं।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘कुरूक्षेत्र’, ‘रश्मिरथि’ हो या हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’। प्रेमचंद की ‘गोदान’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘गबन’ हो या धर्मवीर भारती की ‘गुनाहों का देवता’ या फिर फणीश्वर नाथ रेणु का ‘मैला आंचल’, नागार्जुन का ‘बलचनमा’ अभी भी पाठकों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

प्रकाशकों का मानना है कि इन कालजयी पुस्तकों का आकर्षण नई पीढियों के बीच भी बना हुआ है। शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की कृति ‘देवदास’ और ‘चरित्रहीन’ हाथों हाथ लिया जा रहा है तो भगवती चरण वर्मा की ‘चित्रलेखा’ सभी उम्र के पाठकों की पसंद बनी हुई है। 

प्रभात प्रकाशन के राजेश शर्मा बताते हैं कि प्रेमचंद जैसे पुराने लेखकों की पुस्तकें प्रत्येक स्टॉलों पर उपलब्ध हैं। इन रचनाओं को नई पीढ़ी बड़े चाव से पढ़ रही है। एक अन्य प्रकाशक बताते हैं कि दिनकर की पुस्तक ‘कुरूक्षेत्र’ और भी नई पीढ़ी द्वारा खूब मांगी जा रही है।

राजकमल प्रकाशन के आमोद माहेश्वरी कहते हैं, ‘‘पुराने लेखकों की किताबों का जादू नई पीढ़ी के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। अंग्रेजी में भले ही वे नए लेखकों की पुस्तकें पढम्ना चाहते हो, परंतु जब बात हिन्दी की आती है, तो उनकी पसंद पुराने लेखक ही होते हैं।’’

पुस्तक मेला अपने पूरे शबाब पर है। मेले में प्रतिदिन पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जुट रही है। प्रकाशक पुस्तकों की जानकारी देते-देते थक जा रहे हैं जबकि पुस्तक प्रेमी पुस्तकों की जानकारी लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। प्रकाशक बताते हैं कि रविवार सहित छुट्टी के दिनों में पुस्तक प्रेमियों से मेला परिसर भरा रहता है। 

सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) के बैनर तले लगे इस मेले में प्रतिदिन सभी उम्र के पुस्तक प्रेमियों का हुजूम उमड़ रहा है। शाम के समय पुस्तक प्रेमियों की भीड़ के कारण प्रकाशकों के स्टॉल भरे रहते हैं। 

राष्ट्रीय पुस्तक मेला में नेशनल बुक ट्रस्ट, साहित्य अकादमी, ऑक्सफोर्ड, वाणी, राजकमल, प्रभात प्रकाशन, एकलव्य प्रकाशन, आधार प्रकाशन सहित देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों के स्टॉलों पर पुस्तकों की भरमार है।

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