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एसओएल की कक्षाएं रोजाना शाम को लगेंगी

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के पत्राचार के छात्रों के लिए अच्छी खबर है। वे जल्द ही रेगुलर छात्रों की तरह कॉलेजों में पढ़ सकेंगे। उनके लिए नियमित तौर पर सांध्य कक्षाएं आयोजित होंगी। खास बात यह है कि कॉलेज के शिक्षक ही इन्हें पढ़ाएंगे।
एसओएल के निदेशक सीएस दुबे ने बताया कि ये कक्षाएं प्रात: कॉलेजों में लगेंगी। रेगुलर छात्रों की कक्षाएं प्रभावित न हों, इसे देखते हुए वहां शाम में सांध्य कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि कक्षाओं के लिए सांध्य कॉलेजों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इस बाबत फैसला ले लिया गया है। कई कॉलेजों से बातचीत जारी है। इनमें देशबंधु, रामानुजन और खालसा आदि कॉलेज शामिल हैं। नए सत्र (2015-16) से इसे लागू किया जाएगा।

निदेशक का कहना है कि योजना को शुरू करने का मकसद पत्राचार के 100 फीसदी छात्रों को कक्षाओं तक पहुंचाना है। विभाग के अनुसार कुछ साल पहले तक एसओएल के सिर्फ 20 फीसदी छात्र ही कक्षाओं में आते थे। विभाग ने छात्रों की इस उदासीनता को दूर करने का काम किया और पर्सनल कॉन्टेक्ट प्रोग्राम (पीसीपी) की शुरुआत की। पीसीपी कक्षाएं अवकाश के दिनों में निर्धारित केंद्रों में आयोजित की जाती हैं।

एसओएल के अनुसार पीसीपी की शुरुआत से करीब 70 फीसदी छात्रों ने कक्षाओं में दिलचस्पी दिखाई। अब विभाग कॉलेज में नियमित कक्षा शुरू करके पत्राचार के सभी 100 छात्रों को कक्षा तक पहुंचाकर उन्हें कॉलेज जैसी सुविधा प्रदान करेगा।

पसंद के आधार पर कॉलेज
छात्रों से उनकी पसंद के कॉलेज के बारे में पूछा जाएगा। प्राथमिकता लिखित तौर पर देनी होगी। इसके आधार पर कॉलेज आवंटित किया जाएगा। हालांकि, इसमें कोर्स की उपलब्धता व टाइम टेबल के हिसाब से समय-समय पर बदलाव किया जाएगा। मान लीजिए हंसराज कॉलेज में राजनीति विज्ञान ऑनर्स की कक्षाएं नहीं लगाई जा रही हैं। इसकी जगह केएमसी में कक्षाएं आयोजित हो रही हैं तो भले ही छात्रों को हंसराज कॉलेज मिला हो मगर उसे टाइम टेबल के हिसाब से केएमसी में राजनीति विज्ञान का पाठ्यक्रम पढ़ना होगा।

कटऑफ में कमी आएगी
योजना के शुरू होने से डीयू की  ऊंची कटऑफ पर असर पड़ेगा। बीते दो सालों से 100 फीसदी के आंकड़े को छूने वाली कटऑफ में गिरावट देखने को मिलेगी। दरअसल, रेगुलर कॉलेज में कम सीटें और आवेदकों की संख्या अधिक होने की वजह से कॉलेज ऊंची कटऑफ जारी करते हैं। मुकाबला कड़ा होता है और चुनिंदा छात्रों को ही रेगुलर में पड़ने का मौका मिल पाता है, लेकिन अब नए सत्र से एसओएल की इस योजना से पत्राचार के छात्रों को रेगुलर कॉलेजों में पढ़ने का मौका मिलेगा। एसओएल में कॉलेजों की सारी सुविधाएं मिलेंगी। इसे देखते हुए छात्र पत्राचार की ओर रुख करेंगे और कॉलेजों में आवेदकों की संख्या में थोड़ी कमी आएगी। इससे कॉलेजों की कटऑफ में गिरावट देखने को मिलेगी।

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