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एक साल में खसरा का तीसरा बड़ा मामला आया सामने

शहर के एक गांव रामापुरा में खसरा के 16 मामले सामने आए हैं। सभी मामले पांच साल तक के बच्चाों में पाए गए हैं। खसरा संक्रमण रोग होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है और गांव सहित आसपास के इलाकों में टीकाकरण की गति बढ़ा दी है। रामापुरा गांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कासन के तहत आता है। इस गांव की जनसंख्या करीब 40 हजार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और स्वास्थ्य विभाग की आईडीएसपी यूनिट के सदस्यों ने गांव का दौरा करके स्थिति का जायजा लिया है। इस साल गुड़गांव में खसरा के 70 से ज्यादा मामले आ चुके हैं।


इन 16 मामलों में से चार बच्चाों में खसरा पॉजिटिव पाया गया है। पाजिटिव का मतलब है कि इनमें खसरा का वायरस ज्यादा सक्रिय है। सिविल सजर्न डॉ पुष्पा बिश्नोई ने बताया कि पीएचसी कासन सहित सभी पीएचसी,शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और सीएचसी के डॉक्टरों के साथ बैठक की गई है। सभी पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट किया गया है। स्वास्थ्य विभाग और डब्ल्यूएचओ की टीम संयुक्त रूप से इन क्षेत्रों में टीकाकरण केंद्रों पर दौरे कर रही है। केंद्रों पर मौजूद डॉक्टरों,एएनएम,आशा कार्याकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को खसरा के लक्षण दिखते ही बच्चाों को इलाज के लिए लाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

एक साल में तीसरा बड़ा मामला
रामापुरा गांव में खसरा का मामला इस साल का तीसरा बड़ा मामला है। डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार एक ही गांव,कस्बे से ज्यादा मामला आने पर उसे संजीदा माना जाता है। इससे पहले बंधवाड़ी में 16 मामले आए थे। जिनमें पांच पाजिटिव थे। अंबेडकर नगर कॉलोनी से भी 12 मामले आ चुके हैं। यहां तीन मामले पॉजिटिव थे। अन्य दोनों मामले फिरोज गांधी कॉलोनी शहरी स्वास्थ्य केंद्र और पीएचसी वजीराबाद के अंतर्गत आए हैं।

खसरा के लक्षण
बुखार के साथ शरीर पर लाल दाने, लाल आंखें,खांसी और जुकाम होने पर ये खसरा हो सकता है। डॉ धीरेंद्र त्यागी कहते हैं कि यदि बच्चाे में इन लक्षणों के साथ उल्टी-दस्त या निमोनिया भी हो तो बच्चाे की मौत भी हो सकती है। खसरा के लक्षण दिखते ही उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास लाना जरुरी है। खसरा पीड़ित बच्चाों अपने आसपास के स्वस्थ बच्चाों को भी प्रभावित कर सकता है।

इन्हें भी खतरा
डब्ल्यूएचओ के अनुसार पांच साल तक के बच्चाों को खसरा होने की सबसे अधिक संभावना होती है। साथ ही ऐसे किशोर और युवाओं को भी खसरा हो सकता है जिन्होंने बचपन में खसरा का टीका नहीं लगवाया है। खसरा से बचाव के लिए टीकाकरण ही उपाय है।
वजर्न-
‘जिले में डब्ल्यूएचओ के चारों मॉनिटरों को अलर्ट किया गया है। ये मॉनिटर अपने ब्लॉक में निजी डॉक्टरों,पीएचसी,सामान्य अस्पतालों में जाकर खसरा के लक्षणों वाले मरीजों की जांच कर रहे हैं।’
डॉ धीरेंद्र त्यागी,कंसल्लटेंट डब्ल्यूएचओ गुड़गांव जोन

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