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सारण में राजीव प्रताप रूडी के लिए जश्न

करीब साढ़े पांच साल बाद सारण संसदीय क्षेत्र को एक बार फिर केंद्र सरकार में भागीदारी का मौका मिला है। यहां से तीसरी बार सांसद चुने गये राजीव प्रताप रूडी को केंद्र सरकार में दुबारा शामिल होने का मौका मिला है। इसके पहले 1999 में केंद्र में एनडीए की बनी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें राज्य मंत्री बनने का मौका मिला था। तब रूडी आजादी के बाद इस संसदीय के पहले प्रतिनिधि थे, जिन्हें केंद्र में मंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ था। सबसे पहले उन्हें उद्योग व वाणिज्य राज्य मंत्री की जिम्मेवारी मिली, लेकिन बाद में उसी सरकार में उन्हें प्रमोट कर नागरिक उड्डयन मंत्रलय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया।

पिछले कुछ समय से वे संगठन में राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेवारी निभा रहे थे। हाल में ही उनके प्रभार वाले महाराष्ट्र में भाजपा को बड़ी सफलता मिली। इस लिहाज से यहां के लोग रूडी को इस बार कैबिनेट मंत्री बनाये जाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन एक दशक बाद भी उन्हें राज्य मंत्री के रूप में स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्रलय ही नसीब हो सका।

राबड़ी को हराने का भी नहीं मिला था इनाम
बीते लोकसभा चुनाव में स्थानीय जनता के बीच रूडी को रेल मंत्रलय मिलने का मुद्दा जोर-शोर से उछाला गया था। विभिन्न चुनावी मंचों पर न केवल यहां के नेताओं ने यह मांग राष्ट्रीय नेताओं के सामने रखी, बल्कि भीड़ के बीच से भी कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने इस बारे में आवाज बुलंद की।

इसके पीछे वजह साफ थी-यहां के सांसद के रूप में बतौर तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की ओर से जिले में विकास की बड़ी लकीर का खींचा जाना। अंतत: जब चुनावी नतीजा सामने आया तो मोदी लहर पर सवार रूडी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पराजित कर चुके थे। तब यहां के लोग पूर्व में मंत्रलय संभालने के अनुभव को देखते हुए राबड़ी को हराने के इनाम के रूप में उन्हें बड़ा मंत्रलय मिलने की उम्मीद कर रहे थे।

लेकिन, 26 मई को नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के दौरान रूडी को मंत्रलय में जगह नहीं मिल सकी थी। इसके बाद यहां के लोगों में मायूसी साफ तौर पर दिख रही थी और उसी समय से मंत्रिमंडल विस्तार पर लोगों की नजरें टिकी थीं। इस बार रूडी समर्थकों को मंत्रलय में उन्हें जगह मिलने को ले खुशी तो है और वे पटाखे फोड़ व मिठाई बांट जश्न भी मना रहे हैं, लेकिन कैबिनेट मंत्री नहीं बनाये जाने को ले कसक भी है।

नमो व सारण की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती
रूडी को चाहे जो जिम्मेवारी मिली है, लेकिन उनके सामने इस बार दोहरी चुनौती है। पहली चुनौती तो प्रधानमंत्री की कसौटी पर खरा उतरने की है, लेकिन दूसरी चुनौती क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें पूरी करने की है। पिछली बार उनके मंत्रलय का कामकाज तो संतोषप्रद रहा था। केवल परिजनों के गोवा टूर के सरकारी खर्चे से बिल भुगतान के विवाद को छोड़ दें तो अन्य कोई आरोप भी उन पर नहीं लगा था, लेकिन सारण के विकास के मोर्चे पर वे लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके थे।

उद्योग व वाणिज्य राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने यहां ङींगा पालन की दिशा में कई कदम उठाये, लेकिन फलाफल कुछ नहीं मिला। यहां के बहुतेरे किसानों ने आंध्रप्रदेश जाकर ङींगा पालन के गुर सीखे। कई खेत गड्ढे में तब्दील हो गये पर मुनाफा की बात तो छोड़ दें, किसानों को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी। सरकार बदलते ही सब कुछ ठप हो गया। नागरिक उड्डयन मंत्रलय की ओर से तो उनके पास यहां बहुत कुछ करने का मौका भी नहीं था। उन्हें इसका खामियाजा बाद के चुनावों में उठाना पड़ा और यहां वे लगातार दो चुनाव हार गये। लिहाजा इस बार लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए यहां के हिसाब से वे योजनाएं तैयार करेंगे, जिसका लाभ लोगों को सही मायने में मिल सके।

डेढ़ दशक पहले इस संसदीय क्षेत्र के किसी प्रतिनिधि को पहली बार केंद्र में भागीदारी का मिला था मौका
वाजपेयी सरकार में रूडी पहले राज्य मंत्री बने थे और बाद में उन्हें स्वतंत्र प्रभार वाला मंत्रलय मिला था
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केंद्र में सारण का प्रतिनिधित्व
1999-2004 : राजीव प्रताप रूडी
2004-2009 : लालू प्रसाद यादव
नवंबर 2014 से : राजीव प्रताप रूडी

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