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मोदी का मंत्री मंडल विधान सभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा

यूपी के विधानसभा चुनाव में भले ही अभी लगभग ढाई साल का वक्त हो लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी फतह के लिए अभी से ताना- बाना बुनने लगे हैं। केन्द्रीय मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में भी यूपी को दी गयी तरजीह इसका संकेत है।

भाजपा इस विस्तार के जरिए न केवल सामाजिक समीकरण साधना चाहती है, बल्कि यह भी संदेश देना चाहती है कि उसे सबसे ज्यादा सांसद देने वाले यूपी की अहमियत अब इन मंत्रियों के जरिए और बढ़ेगी। विस्तार में पार्टी ने उप्र में विधान सभा के चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय संतुलन व जातिगत आधार का भी ध्यान रखा गया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यहां के छिटके हुए सामाजिक समीकरण बहुत मायने रखते हैं। सपा-बसपा की ताकत का मुख्य कारण यही समीकरण हैं। भाजपा को इस चुनौती से दो-चार होना है। सपा जहां अतिपिछड़े वर्ग को लेकर चल रही है, वहीं बसपा का आधार दलितों के वोटों पर टिका है। दोनों दल सर्वसमाज को भी महत्व दे रहे हैं। यही संदेश भाजपा ने भी मोदी मंत्रिमण्डल के पहले विस्तार में दे दिया है। यह बता दिया है कि उत्तर प्रदेश में वह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए किस तरह की तैयारी कर रही है। पार्टी ने नए मंत्रियों के जरिए प्रदेश के चार प्रमुख वर्गो ब्रा2ाण, दलित, पिछड़ा व अल्पसंख्यक को एक साथ संदेश देने की कोशिश की है।

मोदी मंत्रिमंडल में जो नए चेहरे शामिल किए हैं, उसमें गौतमबुद्धनगर से सांसद डॉ. महेश शर्मा साफ सुथरी छवि वाले और पेशे से चिकित्सक हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी ने ब्रा2ाण वोटों के लिए डा. शर्मा को आगे किया है। केन्द्रीय मंत्री मनोहर पर्रिकर भी ब्रा2ाण हैं। आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया को पार्टी दलित चेहरे के रूप में बढ़ा रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने श्री कठेरिया को मंत्री बनाकर दलितों को संदेश दे दिया है। पार्टी के मुस्लिम चेहरे माने जाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी रामपुर के रहने वाले हैं। वह राज्यसभा में हैं। साध्वी निरंजन ज्योति पहली बार सांसद बनीं और अब मंत्री बन गईं। वे लोध जाति की हैं जो अतिपिछड़ी है। 

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