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विकास के पैसे बैंक में सूद से चमकाये दफ्तर

आदिवासी विकास के पैसे के दुरुपयोग तथा योजनाओं की दुर्गति में मेसो अफसरों ने एक से बढ़कर एक खेल किये हैं। एसटी छात्रावास बनाने के लिए केंद्रीय सहायता की राशि खर्च नहीं की गयी। अलबत्ता पैसे बैंक में रखे गये और सूद (ब्याज) से अफसर के दफ्तर की मरम्मत करा दी गयी। 2003 से 2007 तक छात्रावास बनाने के लिए 183.84 करोड़ आबंटन के विरुद्ध महा 85.55 करोड़ ही खर्च किये गये। शेष रोड़ मेसो अफसरों ने बैंक के खाते में रख दिये। विशेष केंद्रीय सहायता और केंद्र प्रायोजित योजना के पैसे के सही उपयोग के लिए अफसरों ने जिम्मेदारी नहीं निभायी। 2006 में मेसो अफसर रांची ने अनियमित रूप से 36.24 लाख कोषागार में जमा कर दिये। मेसो अफसर खूंटी ने कोषागार में रखे पैसे के ब्याज से डीसी के आदेश पर एसडीओ दफ्तर की मरम्मत पर 4.23 लाख खर्च किये। पूछताछ में विभाग ने बताया (नवंबर 2007 में) सरकार के निर्देशानुसार ब्याज को सरकारी निधि का भाग मानते हुए कोषागार में जमा किया गया। सूद के खर्च पर विभाग ने आयुक्तों को ऐसा करने से मना किया। कैग की रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि केंद्र द्वारा विमुक्त फंड पर अर्जित सूद योजना राशि का भाग था और इसे विभागीय प्राप्तियों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता था। मेसो खूंटी ने दिसंबर 2006 में विभिन्न एजेंसियों को 3.55 करोड़ का एडवांस दिया और कैशबुक में इसे अंतिम व्यय के रूप में दिखा दिया। अन्य मेसो परियोजनाओं ने भी ऐसा ही किया। विकास के पैसे एडवांस में देने के बाद भी अंतिम खर्च के आंकड़ें दिखा दिये।

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