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लोगों के सुझाव के आधार पर गंगा की सफाई

लोगों के सुझाव के आधार पर गंगा की सफाई

सरकार ने वाराणसी एवं अन्य शहरों में गंगा एवं सहायक नदियों में गंदगी और रासायनिक एवं औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह पर पूर्ण रोक लगाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है और इस विषय पर आम लोगों से सुझाव मांगा है। इस कार्य का खाका तैयार करने के लिए विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
   
जल संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इस संबंध में नदी के नाम लिखते हुए लोग मंत्रालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन माध्यम से 600 शब्दों में अपने सुझाव पेश कर सकते हैं।
   
उन्होंने कहा कि वाराणसी एवं अन्य शहरों में उसकी सहायक नदियों में गंदगी एवं रासायनिक अपशिष्टों के प्रवाह पर रोक लगायी जायेगी। इसका खाका तैयार करने के लिए विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है। गंगा की अविरल एवं निर्मल धारा सुनिश्चित करने के संबंध में रिपोर्ट दिसंबर के मध्य तक आने की उम्मीद है।
   
गंगा में अस्थि विसर्जन के विषय को शंकराचार्यों, अखाड़ों और धार्मिक संस्थाओं पर छोड़ने का निर्णय किया गया है। सरकार ने गोमुख से गंगा सागर तक हरियाली पर जोर देने और चुनिंदा शहरों एवं नगरों में इस नदी के तट पर घाटों एवं रिवरफ्रंट के विकास एवं प्रबंधन की योजना बनाई है।  

गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर ऐसे ही नयनाभिराम रिवरफंट्र का विकास किया गया है जहां हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग एवं उनकी पत्नी ने भारत यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शाम गुजारी थी।  
   
गंगा में प्रदूषण फैलने से रोकने एवं उसे सीमा के भीतर रखने के लिए कुछ पहल जरूरी है। मंत्रियों के मार्गदर्शन में सचिवों के समूह ने कुछ गतिविधियों की पहचान की है। इसमें एक प्रमुख पहल चुनिंदा शहरों एवं नगरों में इस नदी के तट पर घाटों एवं रिवरफ्रंट का विकास एवं प्रबंधन है।
   
सरकार ने कानपुर में औद्योगिक प्रदूषण को समाप्त करने को प्राथमिकता की सूची में शामिल किया है। चार धाम यात्रा के संबंध में कार्य योजना तैयार करने का निर्णय किया गया है जिसमें जन सुविधाओं, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं का विकास शामिल है। इस उद्देश्य के लिए शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता का विकास करने को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
   
गंगा में जलीय जीवन के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा जिसमें डॉल्फिन, कछुओं और घड़ियाल आदि पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। गंगा नदी के आसपास फूलों एवं अन्य पूजा सामग्रियों के निपटारे की भी व्यवस्था की जायेगी।

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