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मैं आपका प्रतिनिधि, आपका सेवक बनकर आया हूं

अपने संसदीय क्षेत्र के पहले संबोधन में जो कहा, लगभग चौबीस घंटे के प्रवास के दौरान उसे जिया भी। मैं आपका प्रतिनिधि, आपका सेवक बनकर आया हूं। आपके सुख-दुख का साथी..। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से यह बात सुनने के बाद तालियां बजी थीं और हर-हर महादेव का घोष भी हुआ। यह था, उस वक्तव्य को काशी की स्वीकार्यता जिसे यहां के लोग आजमाकर निर्णय सुनाते हैं।

रोब-दाब, गुरुर, एलान सब दरकिनार। विनम्रता से भरे हर शब्द से जुड़े तो जुड़ते चले गए। व्यापार सुविधा केंद्र के शिलान्यास के मौके पर बातें थोड़ी सरकारी लेकिन ज्यादातर धरातल पर। कभी सोचना पड़ता कि प्रधानमंत्री बोल रहे हैं या फिर घर का कोई अदना सदस्य सच से सामना करा रहा। अपने घर-परिवार के गौरव पर रिझाने, समझाने का ढंग भी अलहदा था। खोजिए, कहां गलत कहा। कहां सच से दूरी बनाई। बनारसी साड़ी हर मां का सपना होता है। सोचती है कि बेटी विदा हो तो एक बनारसी साड़ी उसके साथ जरूर जाए। अगले कुछ सालों में 20 करोड़ बेटियों की शादी का आंकड़ा पूरे आत्मविश्वास के साथ रखा। याद दिलाया कि बनारसी साड़ी को भूलने की जरूरत नहीं। संभावनाओं से भरा बड़ा मार्केट सामने खड़ा है। बस, थोड़ा बदलाव, आज के साथ कदमताल मिलाने की सलाह दी। अपग्रेडेशन की व्याख्या सरल ढंग से की। परेशान होने की जरूरत नहीं, जहां हैं वहीं रहकर कौशल विकास करें। जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

जयापुर गांव में सुखपूर्वक जीने की राह दिखाई-सिखाई। प्रार्थना है कि यह गांव मुङो गोद ले ले। सांसद गांव गोद लेंगे, इस सूचना को खारिज किया। सांसद को गोद लेगा गांव। वहां के पुराने-बुजुर्ग लोग सिखाएंगे कैसे करें विकास। सहजतापूर्वक सारी बातें कह रहे थे नरेंद्र मोदी। जोड़ा भी कि कुछ लोगों को भ्रम है कि सांसद आदर्श ग्राम योजना में बहुत पैसा आएगा। दरअसल, जहां पैसा जुड़ता है, भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। फिर ठोस इरादा जाहिर किया- सरकारी खजाने की बदौलत नहीं समाज की शक्ति से विकास करेंगे। कई फामरूले बताए। एक प्रधानमंत्री ऐसा बोलेगा- कभी सोचा नहीं था। आमतौर पर शासनाध्यक्षों के आने पर उम्मीदों का पहाड़ खड़ा हो जाता है। पिछले अनुभव बताते हैं कि घोषणाओं की थैलियां खुला करती थीं। लेकिन जो कहा, जो सुनाया उसे वास्तविकता के धरातल पर तौलते हुए।

मोदी अपने जनसंपर्क कार्यालय भी गए और कुछ लोगों से मुलाकात कर उनकी तकलीफ, जरूरतें पूछीं। एक महिला ने पति के गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए अस्पताल के खर्च के बारे में बताया तो मोदी संजीदा हो गए। अपने साथ के व्यक्ति से कहा- इस पत्र को सबसे ऊपर रखो। मैं खुद अस्पताल प्रशासन से बात करूंगा।

भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मन की बात की। सदस्यता, सफाई और अगले राजनीतिक संघर्षो को उनके सामने चुनौती के तौर पर रखा। पार्टी की विचारधारा से लोग जुड़ेंगे तो संकल्पों को मजबूती मिलेगी। सामाजिक परिवर्तन की अलख जगाने की चाह बढ़ेगी। पार्टी की स्थापित विचारधारा में बदलाव के साफ संकेत मोदी ने दिए। न धर्म की बातें और न जाति की। सबका साथ- सबका विकास की परिकल्पना पर बल दिया। जो जिसकी जिम्मेदारी है, वह उसे पूरी करे। तभी तो पदाधिकारियों से मिलन में किसी ने नाली-खड़ंजे की बात कर दी, उसे आलोचना ङोलनी पड़ी। पीएम बोले- तो फिर इसके लिए हमें सभासद का चुनाव लड़ना पड़ेगा।

प्रबुद्धजनों के साथ बैठक में अपना विजन रखा तो सुझाव भी मांगे। मुङो चिट्ठी भेजिए। मेरा मार्गदर्शन करिए। ये पीएम बोल रहे हैं या कोई खांटी बनारसी जमीनी हकीकत का इजहार कर रहा है। मोदी बोले- मैंने देखा, यहां जितनी बिजली नहीं आती उससे ज्यादा तार हैं। पूरे के पूरे जाल। शुद्ध पानी नसीब नहीं है गंगा किनारे के लोगों को। कोई पीएम इस हद तक होमवर्क करके आता है, यह बात प्रबुद्धजनों के अचरज की थी।


सचमुच, जब अपना एमपी, पीएम बनकर आता है तो गौरवबोध स्वाभाविक है। ..लेकिन चौबीस घंटे में यदि सुरक्षा तामझाम को छोड़ दिया जाय, नहीं लगा कि प्रधानमंत्री आए हैं। न मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य साथ था और न आसपास के जिले का कोई सांसद। संभवत: सबको अपने इलाके में अपना काम करने की हिदायत थी। किसी तरह के प्रोटोकाल में फंसने से मना किया गया था।

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