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मेरठ को दरकिनार कर रामपुर में होगा भूमिगत विद्युतीकरण

भले ही शाहिद मंजूर सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हों, लेकिन सत्ता के गलियारों में आजम खां का ही जलवा है। शासन को पश्चिमांचल वितरण निगम के अंतर्गत 14 जिलों में से एक को भूमिगत विद्युतीकरण योजना में शामिल करना था। इसमें राजस्व का मानक तय किया गया है। जिस जिले से सर्वाधिक राजस्व मिलता है, वहां यह योजना आवंटित होगी, लेकिन कम राजस्व देने के बावजूद भी आजम खां इस योजना को रामपुर में लाने में कामयाब रहे। अधिक राजस्व देने के बाद भी मेरठ इस योजना से वंचित है।


वेस्ट यूपी में अभी तक प्रदेश सरकार ने किसी भी जिले में भूमिगत विद्युतीकरण नहीं कराया था। इस बार कैबिनेट से यह प्रस्ताव स्वीकृत होना था। प्रस्ताव में सूबे के तमाम मंत्रियों ने अपने जिलों के नाम दिए थे। पश्चिमांचल वितरण निगम की बात करें तो मेरठ से हर वर्ष 13 सौ करोड़ का राजस्व सरकार को मिलता है। यहां बिजली भी 16 घंटे से ज्यादा नहीं मिल पाती है। बावजूद इसके आजम खां ने अपने जिले रामपुर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में शामिल कराया है। यहां से राजस्व सालाना कुल 142 करोड़ ही मिलता है।


मेरठ से आठ गुना राजस्व कम होने के बाद भी रामपुर जिले को इस योजना में शामिल किया गया है। अब पश्चिमांचल वितरण निगम के अंतर्गत रामपुर अंडर ग्राउंड विद्युतीकरण का पहला जिला होगा। पश्चिमांचल वितरण निगम के मुख्य अभियंता ने बताया कि यह योजना रामपुर को दी गई है।
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मेरठ और रामपुर में अंतर :---
जिला             बिजली आपूर्ति       वार्षिक राजस्व
मेरठ                16 घंटे              1300 करोड़  
रामपुर               24 घंटे              142 करोड़  
आंकड़े पावर अफसरों से लिए गए हैं।
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ये जिले हैं पश्चिमांचल वितरण निगम में
मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर आदि
      

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