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..ये सरकारी संपत्ति है भाई..40 लाख खर्च किये सुंदर बनाने पर?3द्वद्यज्ठ्ठड्डद्वद्गह्यश्चड्डष्द्ग श्चrद्गथ्न्3 = o ठ्ठह्य = ह्वrठ्ठज्ह्यष्द्धद्गद्वड्डह्य-द्वन्ष्roह्यoथ्ह्ल-ष्oद्वज्oथ्थ्न्ष्द्गज्oथ्थ्न्ष्द्ग

राजधानी के प्रमुख चौराहों के सौंदर्यीकरण पर वर्ष 2007 में लगभग 40 लाख रुपये खर्च हुए थे। इनमें लालपुर, कोकर, सिरमटोली चौक प्रमुख था। चौक के चारो किनारों पर यात्रियों को चलने के लिए टाइल्स लगाये गये थे। नक्काशीदार लोहे के रलिंग भी। हालांकि उसी वक्त यह मामला विवाद में फंसा था। घटिया निर्माण के जांच के आदेश हुए। जांच भी हुई। पर मामला बाद में रफा-दफा हो गया। लेकिन घटिया निर्माण की कलई आज खुल चुकी है। रलिंग है तो टाइल्स गायब है। टाइल्स है तो रलिंग को लोग ले भागे हैं। लेक्ट्रॉनिक डिसप्ले बोर्ड बना चिड़िया का घोंसलाआपको याद होगा, बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में हॉट लिप्स चौक, धुर्वा गोलचक्कर, अलबर्ट एक्का चौक और कुछ अन्य स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक डिसप्ले बोर्ड लगे थे। जिला प्रशासन ने ये बोर्ड आपको देश-विदेश और राज्य की अद्यतन सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए लगाये थे। इन पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए थे। आज इस पर आम जनता के लिए कोई सूचना डिसप्ले नहीं हो रहा है। लोहे के चदरों से बना उसका ढांचा टूट-टूट कर गिरता जा रहा है। चिड़िया इसमें अब अपना घोसला बना रही हैं। बोर्ड के निर्माण के बाद सूचनाओं के डिसप्ले की जिम्मेदारी किसे दी गयी थी, जिसे दी गयी थी वह उसे क्यों नहीं पूरा कर रहा है, कोई जानने-समझने की भी कोशिश नहीं कर रहा। आज आपको इन बोर्डो से कितनी सूचनाएं मिल रही हैं, आपसे बेहतर और कौन जान सकता है। राजधानी के चौक-चौराहों और यात्री शेडों के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये सरकार ने खर्च किये। वे कितने सुंदर दिखते हैं, आपको बताने की जरूरत नहीं है। इसी तरह अजरुन मुंडा के कार्यकाल में लालपुर चौक, कोकर चौक, सिरमटोली चौक और अन्य चौकों का नये सिर से सौंदर्यीकरण किया गया था। आज इन चौकों पर लगे लोहे के रलिंग गायब हैं। यात्रियों के चलने के लिए बैठाये गये टाइल्स अपनी दुदर्शा पर आंसू बहा रहे हैं। कांटा टोली : यात्री शेड या कूड़ेदानकांटाटोली चौक राजधानी के बीचोबीच स्थित ऐसी जगह है जहां से राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए यात्री वाहन गुजरते हैं। चौक से रामगढ़ की ओर 25 कदम बढ़ने पर वर्षो पूर्व यात्रियों की सुविधा के लिए एक शेड बनाया गया था। शेड आज भी लगभग ठीक-ठाक है। पर वहां पर वाहनों की प्रतीक्षा में यात्री नहीं ठहरते। कारण यह कूड़ेदान बन चुका है। पेशाबखाना भी। इस ओर न तो रांची नगर निगम का ध्यान जाता है और न ही जिला प्रशासन का। ठेला वालों के लिए चौड़ी हुई सड़कवर्तमान में विपक्ष के नेता अजरुन मुंडा के आवास की बाउंड्री पीछे करवायी गयी थी। यह काम तत्कालीन भवन निर्माण एवं पथ मंत्री सुदेश महतो ने करवाया था। उनकी सोच थी कि सर्किट हाउस चौक और चोड़ी होगी। इससे यात्रियों को आने-ााने में सुविधा होगी। परंतु लाखो रुपये के खर्च के बाद बाउंड्री वाल को कम चौड़ा कर दिया गया, सड़क के चौड़ीकरण के लिए जगह भी बनी, पर आज वहां ठेला-खोमचे वालों की जगह बन गयी है। ं

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  • Web Title: ..ये सरकारी संपत्ति है भाई..40 लाख खर्च किये सुंदर बनाने पर?3द्वद्यज्ठ्ठड्डद्वद्गह्यश्चड्डष्द्ग श्चrद्गथ्न्3 = o ठ्ठह्य = ह्वrठ्ठज्ह्यष्द्धद्गद्वड्डह्य-द्वन्ष्roह्यoथ्ह्ल-ष्oद्वज्oथ्थ्न्ष्द्गज्oथ्थ्न्ष्द्ग