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मरीज बिकता है, बोलो खरीदोगे।

मरीज बिकता है, बोलो खरीदोगे। सुनने में भले ही अटपटा लगता है, लेकिन यह बात सोलह आने सच है। बंध्याकरण के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को अपने नाम करने के लिए एएनएम के बीच मारामारी होती है। बंध्याकरण के लिए आने वाले लोगों की बोली लगती है। जो एएनएम अधिक रुपये देती हैं, आशा कार्यकर्ता मरीज को उनके नाम कर देती हैं। आशा कार्यकर्ता अधिक बोली लगने का इंतजार तक करती हैं। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि एक मरीज को अपने नाम कराने के लिए एएनएम चार से पांच सौ रुपये आशा कार्यकर्ताओं को देती हैं।


नाम न छापने की शर्त पर हरनौत की कई आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि बंध्याकरण कराने के लिए आने वाली एक महिला के लिए डेढ़ सौ तो पुरुष के लिए दो सौ रुपये दिये जाते हैं। अस्पताल में नाम इंट्री होने के पहले एएनएम उन आशा कार्यकर्ताओं को चार सौ से पांच सौ रुपये देकर मरीज को अपने नाम कराती हैं। आशा कार्यकर्ता को भी लाभ हो जाता है और एएनएम को टारगेट पूरा करने में मदद मिलती है।


कई एएनएम ने बताया कि बंध्याकरण टारगेट पूरा करने के लिए ऐसा करना पड़ता है। टारगेट पूरा न होने पर वेतन बंद के साथ ही अन्य कार्रवाई भी की जाती है।


हरनौत रोगी कल्याण समिति के वरीय सदस्य चंद्रउदय कुमार मुन्ना, रजनीश कुमार व अवधेश कुमार बताते हैं कि एएनएम को कार्रवाई से बचने के लिए बंध्याकरण के टारगेट को पूरा करना होता है। लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से एएनएम ऐसा करती हैं। आशा कार्यकर्ता को टारगेट नहीं दिया जाता है। उन्हें मरीज लाने के एवज में केवल रुपये दिये जाते हैं। ऐसे में अधिक राशि मिलने पर आशा कार्यकर्ता अपने मरीज को किसी एएनएम के नाम कर देती हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की मानें तो कमोबेश यही हाल जिले के अन्य अस्पतालों की भी है।

टारगेट पूरा करने की मची होड़ में देखभाल में कमी
रोगी कल्याण समिति के सदस्य चंद्रउदय कुमार मुन्ना बताते हैं कि टारगेट पूरा करने की मची होड़ में क्षमता से अधिक लोगों का बंध्याकरण किया जाता है। बंध्याकरण के बाद लोगों को ठंड में भी अस्पताल के बरामदे में रात में ठहराया जाता है। इसकी शिकायत एक हफ्ते पहले डीएम व सीएस से भी की गयी है। लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।

बोले अधिकारी
हरनौत अस्पताल के प्रभारी डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि बंध्याकरण का लक्ष्य हर एएनएम को दिया जाता है। लक्ष्य पूरा करने वाली कर्मियों को पुरस्कृत किया जाता है। लक्ष्य में पिछड़ने वाली कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है। कमरों की कमी रहने के कारण मरीज बरामदे में रात गुजारते हैं। अभी ठंड भी कम पड़ रही है। बरामदे पर भी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। दूरदराज के गांवों से आने के बाद बंध्याकरण न करने पर भी तो हम दोषी होंगे। प्रत्येक एएनएम को बंध्याकरण के हर माह कम से कम दो केस लाने का टारगेट दिया गया है।

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