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रोड सेफ्टी बिल में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य

रोड सेफ्टी बिल में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य

केंद्र सरकार के प्रस्तावित रोड ट्रांसपोर्ट एंड सेफ्टी बिल में निजी वाहनों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने वाले वाहन मालिकों पर अधिकतम एक लाख रुपये का जुर्माना किया जाएगा। वहीं, सरकार सड़क दुर्घटना में मुआवजे की अधिकतम धनराशि 10 लाख रुपये तय करने जा रही है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के रोड ट्रांसपोर्ट एंड सेफ्टी बिल 2014 सेक्शन 305 में निजी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया है। बिल में बगैर इंश्योरेंस वाले वाहन मालिकों पर 50,000 से एक लाख के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जानकारों का कहना है कि मोटर वाहन अधिनियम में निजी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, लेकिन छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग वाहनों का इंश्योरेंस नहीं कराते हैं। एक अनुमान के मुताबिक देशभर में 60 फीसदी निजी वाहन मालिक इंश्योरेंस नहीं कराते हैं।

इसका प्रमुख कारण है कि बगैर इंश्योरेंस वाहनों के पकड़े जाने पर 100 रुपये का जुर्माना किया जाता है। लोग जुर्माना अदा कर छूट जाते हैं, लेकिन नए नियम में भारी जुर्माने के चलते सभी वाहन मालिक थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने पर विवश होंगे। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बिल में सड़क दुर्घटना के मामले में अधिकतम मुआवजा दस लाख तय करने पर सहमति बन गई है। नए नियम लागू होने पर सडम्क दुर्घटना के मामलों में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) अधिकतम दस लाख से अधिक मुआवाजा नहीं दिला पाएंगे, जबकि वर्तमान व्यवस्था में दुर्घटना में मुआवजे की राशि (एमएसीटी) मृतक की आयु, सामाजिक स्तर, आय, परिवार के आश्रितों की संख्या पर तय करता है। कई बार यह राशि दस लाख से कहीं ज्यादा (30 लाख से एक करोड़ तक) होती है।

इंश्योरेंस कंपनियों को होगा फायदा
आईएफटीआरटी के समन्यवक एसपी सिंह ने सड़क दुर्घटना में मुआवजा राशि तय करने पर विरोध जताया है। उन्होंने सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि नया नियम इंश्योरेंस कंपनियों के हक में है। इससे मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलेगा। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से इंश्योरेंस कंपनियों का व्यवसाय 14 हजार से बढ़कर  30 हजार करोड़ पहुंच जाएगा। वहीं, नए बिल में सरकार के दावे के मुताबिक सड़क दुर्घटनाएं कम होने से अगले पांच साल में दो लाख लोगों की जान बचाई जा सकेगी। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों पर वित्तीय बोझ कम हो जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सड़क दुर्घटना में मुआवजे की राशि तय नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस मद में आने वाली आय को ड्राइवरों के प्रशिक्षण व वाहनों की संरक्षा मजबूत करने पर खर्च किया जाना चाहिए, जिससे लोगों की जिंदगी बचाई जा सके।

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