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साहित्य: कुछ परिभाषाएं

साहित्य एक सम्मान है, साहित्य अपमान है, साहित्य दुरभिमान है, साहित्य अरमान है। साहित्य एक आयोजन है, साहित्य नियोजन है। साहित्य प्रतिक्रिया है, प्रक्रिया है, साहित्य दुष्क्रिया है। साहित्य समाज का मोह है, मोह का समारोह है, साहित्य समाज का आरोह है, साहित्य समाज का विछोह है। साहित्य समाज का द्रोह है। साहित्य समाज का बोध है, साहित्य समाज का क्रोध है, साहित्य समाज का प्रतिरोध है, साहित्य समाज का अनुरोध है। साहित्य समाज का शोध है। साहित्य समाज का संकट है। साहित्य समाज का कर्कट है। साहित्य समाज का मर्कट है। साहित्य समाज का शॉर्टकट है। समाज साहित्य की समस्या है। साहित्य समाज की तपस्या है।

साहित्य एक मकान है, दुकान है, साहित्य एक कमान है, साहित्य एक मचान है, साहित्य एक एहसान है, साहित्य नादान है। साहित्य की एक सुबह है। साहित्य की एक दोपहर है। साहित्य की एक शाम है। साहित्य एक कॉकटेल है। साहित्य एक खेल है। साहित्य पीना है, साहित्य जीना है, साहित्य एक करीना है।  साहित्य साधन है, साहित्य साधना है। साहित्य शव साधना है, साहित्य उत्सव साधना है। साहित्य का मान है, साहित्य का सम्मान है। साहित्य का अपमान है, साहित्य में जान है। साहित्य अनजान है। साहित्य एक एहसान है। साहित्य एक बकवास है, साहित्य सबकी आस है, साहित्य सत्यानाश है। साहित्य एक क्रोध है, साहित्य एक बोध है, साहित्य एक अवरोध है, साहित्य एक शोध है, साहित्य एक अनुरोध है।

साहित्य एक भूल है, साहित्य एक शूल है। साहित्य त्रिशूल है, साहित्य भाषा की चूल है, समाज की भूल है। साहित्य समाज का पूल है, साहित्य समाज की रूल है, साहित्य समाज की हूल है, साहित्य समाज का फूल है, साहित्य समाज का कूल है, महसूल है। साहित्य समाज का बबूल है, साहित्य समाज का टूल है। साहित्य समाज का अविचार है, साहित्य समाज का कुविचार है, साहित्य समाज का सुविचार है, साहित्य समाज का अतिचार है। साहित्य समाज का अचार है।

साहित्य समाज का मसाज है, साहित्य समाज का साज है, साहित्य समाज का काज है, साहित्य समाज की लाज है, साहित्य समाज का अनाज है। साहित्य समाज का तकिया है, साहित्य समाज की बगिया है। साहित्य समाज का बखिया है। साहित्य समाज की अदालत है, साहित्य समाज की अदावत है, साहित्य समाज की खिलाफत है। साहित्य समाज की बगावत है। साहित्य समाज की पंचायत है। साहित्य समाज की मिलावट है, साहित्य समाज की बुनावट है, खिलावट है। साहित्य  समाज की चौधराहट है, बौखलाहट है, घबराहट है, हकलाहट है। साहित्य समाज की आहट है, कराहट है, खर्राहट है, गुर्राहट है, फर्राहट है। साहित्य समाज की सीढ़ी है, साहित्य समाज की पीढ़ी है।

साहित्य समाज का मोबाइल है। साहित्य समाज का गूगल है। साहित्य समाज की गल है। साहित्य समाज का फल है, साहित्य समाज का पल है, साहित्य सामज का कल है, साहित्य समाज का पैनल है, साहित्य समाज का कोलाहल है, साहित्य समाज का दल है। साहित्य समाज का खिलौना है, बिछौना है, समाज का डिठौना है, साहित्य समाज का कोना है, साहित्य समाज का सोना है, साहित्य समाज का होना है, साहित्य समाज का टोना है, साहित्य समाज का खोना है, साहित्य समाज का लोना है, साहित्य समाज का सांवला सलोना है। ऐसे लीलाधर साहित्य को मैं प्रणाम करता हूं..।

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