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स्वच्छता अभियान के लिए बड़ी चुनौती अवैध डेरियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सिरे चढ़ाने के लिए नगर निगम के सामने शहर में चल रही करीब एक हजार अवैध डेरियां एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। शहर की सफाई के लिहाज से इनको कैसे बाहर किया जाए? इस पर अभी तक कोई ठोस प्लान निगम तैयार नहीं कर पाया है। हालांकि शासन और प्रशासन आए दिन सड़कों पर झाडू लगाकर सफाई के  प्रति लोगों को जागरूक करने की हर संभव कोशिश तो कर रहे हैं, मगर डेरियों से आए दिन उत्पादित होने वाले कई टन मलमूत्र का समाधान तलाशना इनके लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है। नगर निगमायुक्त डॉ. सुप्रभा दहिया ने भी डेरियों को एक चुनौती मानते हुए इन पर गंभीरता से काम करने की बात कही है।
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क्या है देवीलाल डेरी योजना
दरअसल, गंदगी के लिहाज से शहर की डेरी को बाहर करने के लिए नगर निगम ने वर्ष 2005-06 में देवीलाल डेरी योजना शुरू की थी। इसके तहत पशुपालकों के लिए फरीदाबाद निगम जोन में नहर पार बसेलवा कॉलोनी और बल्लभगढ़ जोन के मिर्जापुर में प्लॉट काटे गए। दोनों जगह 250 प्लॉट काटे गए। जिनका साइज 70 गज से लेकर 250 गज तक रखा गया था।  इसके अलाटमेंट के लिए एक टीम गठित की गई थी। जिसने शहर में पहले से चल रही डेयरियों का सर्वे किया। इसके बाद आवेदन का मौका भी लोगों को दिया गया। ताकि इच्छुक लोग आगे आ सकें। पहले आओ पहले पाओ की नीति भी अपनाई, मगर प्लॉट अलाटमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस दौरान आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कई लोगों ने निगम अफसरों पर गलत ढंग से प्लॉट आवंटन करने के आरोप भी लगाए।
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डेयरी जोन के लिए फंड के अभाव को बनाता रहा निगम ढाल
करीब आठ वर्ष पूर्व शुरू हुई डेयरी योजना को पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पाने के पीछे नगर निगम आर्थिक दिक्कत को ढाल बनाता रहा है। बसेलवा कॉलोनी में जगह को समतल करने के लिए काफी समय तक निगम वहां कूड़ा डालता रहा। मगर डेयरी संचालकों से जब भी वहां डेयरी स्थानांतरित करने की बात कहीं गई तो उन्होंने हर बार डेयरी जोन में मूलभूत सुविधा नहीं होने की बात कही। योजना के पूरी तरह कामयाब नहीं होने के पीछे पशुपालक इसी को मुख्य कारण मान रहे हैं।

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प्लॉट घोटोल के लग चुके हैं आरोप
कमाल हसन नामक एक व्यकित की शिकायत पर थाना ओल्ड फरीदाबाद में डेयरी योजना मे गलत ढंग से प्लॉट हासिल करने पर धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज हुआ था।। जिसमें आरोप है कि लोकेश व रमेश नामक व्यक्तियों पर अपने व अपने परिजनों के नाम 20 प्लॉट अलॅाट करवाए जाने के आरोप लगाए गए। आरोप था कि प्लॉट हासिल करने वालों का पशु पालन से कोई लेना देना नही है। बहरहाल, पुलिस ने इस मामले की जांच भी की। नगर निगम ने भी अपने स्तर पर जांच करवाई। मगर इस ममाले में क्या हुआ? निगम अफसर इसके प्रति अनभिज्ञता प्रकट कर जांच करवाने की बात कह रहे हैं।
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सीवर और बरसाती नालों के लिए नासूर है डेयरी की गंदगी
शहर में जहां भी अवैध रूप से डेयरी चल रही हैं, उफानी मारती सीवर लाइन और गंदगी से अटे बरसाती नाले वहां की पहचान बन जाती है। पशुओं के मलमूत्र के रूप में वहां काफी गंदगी हर रोज उत्पादित होती है। जिसको उठाने की कोई व्यवस्था निगम के पास नहीं है। नतीजतन आसपास खुले स्थान पर ही डयेरी संचालक गंदगी को डाल देता है। डेयरी वालों के साथ दूसरी दिक्कत पशुओं के बांधने को लेकर रहती है। पर्याप्त जगह नहीं होने की सूरत में गली या फिर सड़क पर ही वो अपने पशुओं को बांध देते हैं। ऐसी अनेक शिकायतें निगम के पास आती रहती हैं। कई वर्ष पहले तत्कालीन उपायुक्त डॉ. प्रवीण कुमार ने डेयरी संचालकों के खिलाफ अभियान चलाया था। जहां भी गंदगी मिली, उन्होंने मौके पर ही गंदगी को देखते हुए कई हजार रुपये का चालान डेयरी संचालक का काट दिया था।

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खास बातें
मिर्जापुर डेरी योजना में प्लाटों की संख्या: 110
बसलेवा कॉलोनी में प्लाटों की संख्या: 148
प्लाट की साइज: 70 से 250 गज
शहर में चल रही अनुमानित डेरियां: 1000
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डॉ. सुप्रभा दहिया, नगर निगमायुक्त: इस मामले की जांच करवाई जाएगी। जो भी अड़चन होगी उसको तुरंत दूर किया जाएगा।

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