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दो टूक

कायदे -कानून दो पैमानों की क्षाजत नहीं देते! पिछली सरकार में महत्वपूर्ण पद पर रहे एक नेता पर हत्या का आरोप लगा तो जेल भेज दिये गये। दूसरी ओर, उसी नेता के पिता की हत्या के आरोपी मंत्री के बार में पुलिस कहती है- जांचेंगे। दूसरी घटना मंगलवार की है। क्रुद्ध भीड़ झारखंड बिजली बोर्ड पर हमला करती है। दो विपक्षी विधायक पर मामला दर्ज होता है। उधर, पलामू में सत्ता समर्थक एक दबंग विधायक बिजली अधिकारी को पीटता है। केस के लिए पुलिस अनुमति मांगती है। राजकाज की यह बानगी न्याय की परिभाषा खंडित करती है। ध्यान रहे! सरकार और तंत्र का कुरूप चेहरा जनता का क्षोभ बढ़ाता है। हदें टूटें, इसके पहले, साफ करें चेहरा!

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