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परसेकर ने परिवार के खिलाफ की थी बगावत

परसेकर ने परिवार के खिलाफ की थी बगावत

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के कट्टर समर्थक रहे अपने परिवार के खिलाफ विद्रोह करके 1988 में भाजपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले लक्ष्मीकांत परसेकर को पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतिफल गोवा के मुख्यमंत्री की कुर्सी के रूप में मिला है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजबूत पृष्ठभूमि वाले 58 वर्षीय परसेकर राजनीतिक रूप से अस्थिर इस राज्य के 22 वें मुख्यमंत्री हैं तथा इस पद आसीन होने वाले 12 वें शख्स हैं।विद्रोही कहे जाने वाले परसेकर ने 1980 के दशक में अपनी राजनीतिक यात्रा प्रारंभ की थी लेकिन उन्होंने जो मार्ग चुना था उसे उनके परिवार ने बिल्कुल खारिज कर दिया था। उन्होंने 1988 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में मंड्रेम विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा था।

उनका कषक परिवार उस समय राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रीय दल महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी का कट्टर समर्थक था। वह 1988 के चुनाव में प्रभावशाली नेता रमाकांत खलप के विरुद्ध चुनाव मैदार में उतरे थे और हार गए थे।

परसेकर के भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के फैसले से उनके परिवार और गांव को झटका सा लगा। उन दिनों उनके गांव में एमजीपी की कड़ी पकड़ थी और भाजपा का इस तटीय राज्य में कोई खास वजूद नहीं था।

परसेकर ने कहा कि मैंने करीब करीब अपना बैग पैक कर लिया था और घर छोड़ दिया था, क्योंकि मेरे परिवार को यह बात हजम नहीं हुई कि मैं महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी :एमजीपी: उम्मीदवार रमाकांत खलप के खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूं। यह वर्ष 1988 की बात है जब भाजपा के बारे में लोगों को बमुश्किल ही कुछ पता था। उन्होंने कहा कि मुझे विद्रोही के रूप में देखा जाता था।

विज्ञान में स्नातोकोत्तर परसेकर ने शुरू शुरू में अध्यापन कार्य किया था और वह परनेम तालुका में संघ के स्वयंसेवक के रूप में काम करने लगे थे। वह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में भाजपा के लिए काम करने लगे । उन्होंने पार्रिकर, राजेंद्र अर्लेकर :अब विधानसभाध्यक्ष:, तथा केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक जैसे भाजपा के प्रदेश दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर पार्टी का जनाधार तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

पार्रिकर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे परसेकर ने कहा, मैं 1988 में मंड्रेम सीट से बुरी तरह हार गया। मेरा पूरा परिवार एमजीपी के प्रति समर्पित था। यहां तक एमजीपी उम्मीदवार मेरे पिता का एक ट्रक भी चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करते थे। 

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