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रावत गुट ने उत्तराखंड में पार्टी के मामलों में अपना प्रभुत्व साबित किया

उत्तराखंड में राज्यसभा की खाली सीट के लिए टिकट हरीश रावत की करीबी मनोरमा शर्मा डोबरियाल को मिलने के साथ ही रावत गुट ने इस पर्वतीय राज्य में पार्टी मामलों में अपना प्रभुत्व फिर से साबित किया है।
       
यह आकलन यहां के राजनीतिक जानकारों का है। देहरादून की पूर्व महापौर मनोरमा इस सीट के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार तो बन गई हैं लेकिन उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जैसे कददावर नेताओं से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा। मनोरमा के नामांकन का श्रेय प्रदेश कांग्रेस कमेटी में रावत खेमे को जाता है जो पार्टी आलाकमान पर इस बात का दबाव डाल रहा था कि वह उसके एक सदस्य को इस सीट से उम्मीदवार बनाये।
        
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रावत ने यह सुनिश्चित करके कि राज्यसभा के लिए टिकट उनके खेमे के किसी व्यक्ति को मिले, एक बार फिर साबित किया है कि उनके हाथों में ना केवल राज्य सरकार की कमान है बल्कि राज्य में पार्टी के मामलों में भी उनका नियंत्रण है।
        
उत्तराखंड में जनता को कांग्रेस के पार्टी मामलों में रावत के बढ़ते प्रभाव का पहला संकेत उस समय मिला जब उनके नजदीकी किशोर उपाध्याय को इस वर्ष जून में यशपाल आर्य के स्थान पर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बना दिया गया।

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