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घर का प्रदूषण फेफड़ों के लिए घातक

घर का प्रदूषण फेफड़ों के लिए घातक

अगर आपको लगता है कि घर में आपका बच्चा प्रदूषण से सुरक्षित है, तो आप गलत हैं। क्योंकि घर के अंदर अधिक प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चे दमा तथा परागज ज्वर (हे फीवर) से ज्यादा पीड़ित होते हैं। एक शोध में यह खुलासा हुआ है।

अमेरिक कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी (एसीएएआई) ने अटलांटा में सालाना वैज्ञानिक बैठक के दौरान अध्ययन को प्रस्तुत किया। इसके मुताबिक, ऐसे बच्चे घर में सिगरेट के धुएं, केरोसिन तथा जैव ईंधन के दहन से ज्यादा प्रभावित होते हैं।

एसीएएआई के सदस्य राजकुमार ने कहा, ‘‘दमा तथा परागज ज्वर का स्तर भारत में वैसे बच्चों में अधिक पाया गया, जिनका सामना घर के अंदर के प्रदूषण से होता है।’’

अध्ययन के दौरान वैसे 70 परिवारों के घरों की जांच की गई, जिनके घर में किसी भी बच्चे में दमा या परागज ज्वर का कोई लक्षण नहीं था, जबकि 70 वैसे परिवारों के घरों की भी जांच की गई, जिनके घर में कम से एक बच्चा दमा या परागज ज्वर से पीड़ित था।

राजकुमार ने अपने अध्ययन में पाया कि जिन परिवारों के बच्चों में दमा या परागज ज्वर के लक्षण देखे गए, उनके घरों में वायु प्रदूषण स्वस्थ बच्चों वाले घरों की तुलना में दोगुना था।

यह अध्ययन पत्रिका ‘सेल’ में प्रकाशित हुआ है।

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