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यूएनसीसीटी के सलाहकार बोर्ड का हिस्सा बना रहेगा भारत

यूएनसीसीटी के सलाहकार बोर्ड का हिस्सा बना रहेगा भारत

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद विरोधी केंद्र के सलाहकार बोर्ड का तीन अतिरिक्त साल सदस्य बने रहने की संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की पेशकश को मंजूर कर लिया है।
   
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने बोर्ड की नौवीं बैठक में अपने बयान में कहा, हम दो अप्रैल, 2015 से शुरू होने वाले तीन अतिरिक्त सालों के (कार्यकाल के) लिए संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी केंद्र (यूएनसीसीटी) के सलाहकार बोर्ड का सदस्य बने रहने की महासचिव की पेशकश को लेकर अपनी सहमति जताना चाहेंगे।
   
उन्होंने कहा, हम आतंकवाद विरोधी इस महत्वपूर्ण केंद्र के साथ आतंकवाद के खतरे से लड़ने में अपना अनुभव साझा करना जारी रखेंगे। मुखर्जी ने कहा कि भारत उस आकलन से सहमत है कि 10 करोड़ डॉलर का नया योगदान यूएनसीसीटी के कामकाज में नई गतिशीलता लाएगा।
   
उन्होंने हालांकि कहा कि वित्त इस पहल का केवल एक ही आयाम हैं। मुखर्जी ने सतर्क करते हुए कहा कि दिसंबर 2015 तक परियोजनाओं के लिए निर्धारित 68 लाख डॉलर की राशि का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
   
उन्होंने कहा, सही तरह से परियोजनाओं के कार्यान्वयन एवं गहराई से उनकी निगरानी महत्व रखती है। मुखर्जी ने यूएनसीसीटी को उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के विचार का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की क्षमता का विस्तार करने की जरूरत है और इस लिहाज से हम सलाह देना चाहेंगे कि यूएनसीसीटी अब एक स्वतंत्र बुनियादी संरचना, चरित्र एवं कार्यबल रखने पर ध्यान दे।
   
यूएनसीसीटी की 2011 में स्थापना की गयी थी। इसकी स्थापना सदस्य देशों की क्षमता निर्माण संबंधी जरूरतों और संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञता को मजबूत करने में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी कार्यान्वयन कार्य बल (सीटीआईटीएफ) के तहत की गयी थी।
   
सउदी अरब केंद्र के सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष है और इसके 22 सदस्यों में भारत के अलावा चीन, रूस, अमेरिका, पाकिस्तान और ब्रिटेन शामिल हैं।

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