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संग्रहालय में देखें 4600 वर्ष पुराने गहने

संग्रहालय में देखें 4600 वर्ष पुराने गहने

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े सोने के कंगनों से लेकर महारानियों के माणिक और नगों की मीनाकारी से बने गहनों ने चंद मिनटों में हजारों सालों की यात्रा करा दी। हर किसी की नजर इन गहनों पर रुक रही थी। राष्ट्रीय संग्रहालय स्थित ‘अलंकार गैलरी’ में 4600 वर्ष पुराने गहने का दीदार कर सकते हैं। शुक्रवार को संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने इसका उद्घाटन किया। राष्ट्रीय संग्रहालय ने 2016 तक ऐसी चार और गैलरी बनाने का दावा किया है।

अलंकार गैलरी में सजे 255 आभूषण भारतीय आभूषण परंपरा की कहानी बयां कर रहे हैं। इस संग्रह में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के गोमेद के मणकों से बने हार से लेकर देवी-देवताओं को अलंकृत करने वाले आभूषण हैं।

इन आभूषणों में रोजमर्रा में पहने जाने वाले गहनों के अलावा विशेष मौकों पर पहने जानी वाली ज्वेलरी भी शामिल हैं। यह गैलरी स्थायी है।

ये बने आकर्षण का केन्द्र
सीप, हाथी दांत, हड्डी और चांदी से बने गहनों से लेकर रत्नजडित सोने के गहनों तक शरीर को सजाने, उसकी रक्षा करने और शक्ति प्रदान करने वाले आभूषण भी गैलरी में प्रदर्शित किए गए है। कोलंबिया का पन्ना, वर्मा और श्रीलंका के माणिक्य, कश्मीर के नीलम और बहरीन के मोती से बने आभूषण दर्शकों के बीच कौतूहल का विषय बना रहा।

कांसे की गैलरी भी खुलेगी
राष्ट्रीय संग्रहालय जनवरी में ब्रॉन्ज (कांसा) गैलरी भी खोलने जा रहा है। वहीं, मार्च तक पांडुलिपि वीथिका खोलने की भी तैयारी है। वीथिका निरीक्षक डॉं. ऊषा बालकृष्णन ने कांच की 25 खानों में रखे आभूषणों की विशेषता बताई। अलंकार गैलरी में आभूषणों को परंपरा के अनुसार करीने से दर्शाया गया है।

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