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घर में उगाए गए पौधे भी आपको रखेंगे स्वस्थ

घर में उगाए गए पौधे भी आपको रखेंगे स्वस्थ

घर के किचन गार्डन में ही कुछ ऐसे पौधे उगाए जा सकते हैं जो सेहत के लिए रामबाण हैं। आंवला, अश्वगंधा, ब्राह्मी सहित ग्वारपाठा (एलोवेरा) जैसे पौधों में मौजूद चिकित्सीय गुण पीलिया, मधुमेह, कब्ज, तनाव व दिल की बीमारियों से आपको सुरक्षित रख सकते हैं।

छठे आयुर्वेदिक कांग्रेस में चिकित्सीय पौधों पर जानकारी लेने व घर पर पौधे उगाने के गुरों को सीखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पार्क एंड गार्डन सोसाइटी के स्टॉल पर पहुंच रहे हैं।

सोसाइटी के निदेशक डॉं. नरेन्द्र कुमार ने बताया कि घर की किचन से निकलने वाले कूड़े को ही चिकित्सीय पौधों के लिए जरूरी खाद को बनाया जा सकता है। डॉं. नरेन्द्र कहते हैं कि पौधों को उगाने के लिए यदि घर की मिट्टी कारगर नहीं है तब भी विशेष बायो खाद से पौधों के लिए जरूरी खाद से इनको उगाया जा सकता है। इसके लिए बायो बुस्टर का बुरादा काम में लाया जाता है। अहम यह है कि किचन से निकलने वाले कचरे से खाद बनाने की विधि को सीखकर बड़ी संख्या में लोग यह आयुर्वेदिक पौधे अपने घरों में ही उगा रहे हैं।

इसमें सब्जी के छिलके, चाय की पत्ती, चावल का माढ़ व बासी रोटी को गमले में दबाकर रखना होता है। इसके बाद उस पर बायो बूस्टर डाल कर पौधों को उगाया जा सकता है। इस विधि से तैयार पौधों को न तो अधिक पानी बिना भी कई दिन तक रखा जा सकता है साथ यह पौधे बिना सूरज की रोशनी के भी बढ़ जाते हैं।

इन पौधों में छिपे हैं कई औषधीय गुण
अर्जुन की पत्तियों के सत से निकलने वाले रस से हृदय की धमनियों की रुकावट को ठीक किया जा सकता है। इसकी दो-दो पत्तियों का इस्तेमाल सुबह शाम करना चाहिए।

स्टीविया में मौजूद शुगर मधुमेह रोगियों के लिए आर्टिफिशियल या सिंथेटिक शुगर जैसा काम करता है। इसमें कम कैलोरी के साथ प्राकृतिक मिठास होती है।

रुद्राक्ष की पत्तियों को पानी में भिगोकर उसके पानी को पीने से तनाव दूर होता है, जबकि रुद्राक्ष के सूखे फल का चूर्ण मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है।

एलोवेरा को सौंदर्य उत्पादों के लिए कारगर माना जाता है, सौंदर्य प्रसाधन के अलाव एलोवेरा चर्म रोग, खांसी व यकृत की बीमारी के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

दूध के साथ खट्टे पदार्थ न लें
आयुर्वेद दूध के साथ किसी भी खट्टी चीज के सेवन को सही नहीं मानता, आयुर्वेद कांग्रेस में आए लोगों की ऐसी भ्रांतियों को दूर करने के लिए क्लीनिक लगाए गए हैं। सलाह लेने पहुंचे लोगों को आयुर्वेदार्चा आरपी पाराशर ने बताया कि दूध के साथ च्वयनप्राश को आयुर्वेद सही नहीं मानता है। हालांकि इन दोनों का अलग-अलग समय पर उपयोग लाभकारी होता है लेकिन साथ में लेना हानिकार हो सकता है। आयुर्वेद की चरक संहिता में वर्णित 18 विरुद्ध आहार में प्रमुख है। इसके अलावा शहद व घी को भी एक साथ लेना सही नहीं बताया गया है जबकि आयुर्वेद स्टार्च युक्त किसी भी सब्जी जैसी भिंडी और अरबी के साथ दही के सेवन को सही नहीं मानता।

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