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वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में बनाया भूत

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में बनाया भूत

भूत होता है या नहीं, इसको लेकर अंतहीन बहस शायद ही खत्म हो। लेकिन इसके अस्तित्व नकारने वाले वैज्ञानिकों ने ही प्रयोगशाला में भूत का भ्रमजाल तैयार करने में कामयाबी पाई है।

तंत्रिका तंत्र या मानसिक रोगों से पीडित मरीज अक्सर अपने आस-पास रहस्यमय अदृश्य मौजूदगी का एहसास करते हैं, जिसे वे अपने हिसाब से देवदूत या राक्षस का नाम देते हैं। स्विट्जरलैंड में इकोल पॉलीटेक्निक लैब के शोधकर्ता ओलाफ ब्लैंक ने ऐसा ही भ्रमजाल तैयार कर यह समझने की कोशिश की है कि आखिर ऐसी अनुभूति करने वाले मरीज के दिमाग में आखिर क्या हलचल होती है और वे भूत पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि वास्तव में अदृश्य आकृति का अनुभव मस्तिष्क के सेंसरीमोटर से निकले संकेतों में बदलाव से होता है। लेकिन मरीज को महसूस होता है कि मस्तिष्क से उपजे ऐसे संकेतों और उससे शरीर में होने वाली किसी हरकत के पीछे कोई बाहरी अदृश्य आकृति है। रोबोटिक उपकरणों की मदद से उन्हें छूने का आभास कराया। तमाम ध्वनियों और कृत्रिम रंगों का भी इस्तेमाल किया गया। मरीजों ने बाद में अपने अनुभव साझा करते हुए वहां अदृश्य शक्ति मौजूद होने का दावा किया।

कई ने तो वहां चार भूत होने की बात कही। कुछ मरीजों ने तो प्रयोग रोकने की गुहार लगाई। शोधकर्ता ग्युलियो रोगेनिनि ने कहा कि इससे भूत-प्रेत का अहसास करने वाले मरीजों की असामान्य स्थिति के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी।

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