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दिल्ली में भाजपा का सर्वे, 18 सीटों पर कड़ी टक्कर

दिल्ली में भाजपा का सर्वे, 18 सीटों पर कड़ी टक्कर

दिल्ली की सत्ता पाने के लिए भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। नई दिल्ली, मालवीय नगर समेत 18 सीटों पर पार्टी के सामने कड़ी चुनौती है। 36 का आंकड़ा पार करने के लिए भाजपा को कमजोर हो रही सीटों पर पकड़ बनानी होगी और कम अंतर से हारी सीटों पर संगठन को मजबूत करना होगा। 

हाल ही में दिल्ली में भाजपा के एक अंदुरूनी सर्वे में यह खुलासा हुआ है। इस सर्वे में आम आदमी पार्टी को दूसरी बड़ी पार्टी माना गया है जो पार्टी को सीधी टक्कर देगी। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में पार्टी की स्थिति आंकने के लिए यह सर्वे कराया गया है। इस सर्वे के आधार पर अब भाजपा आगे के विधानसभा चुनावों की तैयारी करेगी।

सर्वे में डेढ़ दर्जन सीटों पर पार्टी की हालत सबसे खराब बताई गई है, जबकि आधा दर्जन के करीब ऐसी सीटें भी गिनाई गई है जहां पर काम कर भाजपा 15 सालों के बाद दिल्ली में सरकार बनाने का मौका पा सकती है।photo1

कई सीटों पर प्रत्याशी बदलना फायदे का सौदा होगा
सर्वे में माना गया है कि कई सीट है जहां पर प्रत्याशी को बदलना पार्टी के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त यह भी सामने आया है कि भाजपा के साथ 40 प्रतिशत वैश्य, 41 प्रतिशत पंजाबी, 38 प्रतिशत एस.सी. और 52 प्रतिशत पूर्वाचल वोट बैंक है, जबकि कांग्रेस के साथ वैश्य 35 प्रतिशत, पंजाबी 28 प्रतिशत, एस.सी. 25 प्रतिशत और पूर्वाचली 19 प्रतिशत है। वहीं आम आदमी पार्टी के साथ वैश्य 20 प्रतिशत, पंजाबी 1 प्रतिशत, एस.सी 5 प्रतिशत, और पूर्वाचली 3 प्रतिशत है। इसी आधार पर टिकटों का निर्धारण होना चाहिए।

इन सीटों पर है खराब हालत
नई दिल्ली, रोहिणी, शकूर बस्ती, शालीमारबाग, मॉडल टाउन, सदर बाजार, बल्ली मारान, ग्रेटर कैलाश, मालवीय नगर, कस्तूरबा नगर, संगम विहार, अम्बेडकर नगर, देवली, लक्ष्मी नगर, त्रिलोकपुरी, दिल्ली कैंट, हरी नगर, पटेल नगर, तिलक नगर
इन पर कमजोर है भाजपा: नजफगढ़, बिजवासन, पालम, द्वारका, गोकुलपुर

कहां बनेगा कौन सा मुद्दा
युवा: युवाओं में प्रधानमंत्री मोदी का क्रेज है। पार्टी मानती है कि देश बनाने के नाम पर युवा एक जुट होंगे और इसका फायदा पार्टी को मिल सकता है।
महिलाएं: केंद्र सरकार बनने के बाद महिलाओं के सबसे बडम हथियार अब तक महंगाई नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम माने जा रहे हैं।
मध्यम वर्गीय वर्ग: केंद्र में सरकार बनने के बाद में मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए टैक्स में छूट दी गई है। साथ ही पेट्रोलियम के दाम गिरे हैं।

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