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कोर्ट ने सरकारी बंगलों के अवैध कब्जाधारकों की सूची मांगी

कोर्ट ने सरकारी बंगलों के अवैध कब्जाधारकों की सूची मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राजधानी के लुटियन जोन में सरकारी बंगलों में रहने वालों के नामों की जानकारी दो हफ्ते में देने का निर्देश दिया है। इनमें बंगलों के विवरण के साथ ही उन व्यक्तियों के नाम भी बताने हैं जो अनधिकृत रूप से रह रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से कहा कि टाइप 6 के सरकारी बंगलों में रहने वालों का विस्तृत विवरण संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले पेश किया जाए, नहीं तो आप बाद में कहेंगे कि संसद चल रही है इसलिए विवरण नहीं दिया जा सकता। संसद का शीतकालीन सत्र 24 नवंबर से शुरू हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार यह भी बताए कि पांच फीसदी के विवेकाधीन कोटे से कितने लोगों को मकान दिए गए हैं। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 21 नवंबर को करेगा।

सुनवाई के दौरान इस मामले में एमाइकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोडम ने पीठ से कहा कि सरकार से यह भी पूछा जाए कि पांच फीसदी विवेकाधीन कोटे के आधार क्या हैं। उन्होंने कहा कि इन बंगलों में अब भी लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह की पत्नी सरोज कुमारी हैं जो बंगले में बनी हुई हैं जबकि सिंह की मृत्यु 2011 में हो चुकी है। सरकार ने उनसे स्वास्थ्य के आधार पर बंगला खाली नहीं करवाया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले सूची आने दीजिए उसके बाद सरकार से विवेकाधीन कोटे का आधारों के बारे में पूछा जाएगा और संदिग्ध मामलों में फाइल ही मंगवा ली जाएगी।

इस बीच केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि पूर्व मंत्री पवन कुमार बंसल, ए. राजा, दयानिधि मारन, एस.एम. कृष्णा, मुकुल वासनिक, सीपी जोशी और मुकुल राय ने सरकारी आवास हाल ही में खाली कर दिए हैं। सरकार ने उन व्यक्तियों के बारे में अपनी रिपोर्ट पेश की जिनके नाम मीडिया रिपोर्ट में अनधिकृत कब्जाधारकों के रूप में सामने आए थे। 

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सामान्य पूल में टाइप 7 और टाइप 8 के 126 और 187 आवासीय परिसर हैं। राजधानी में करीब 61, 466 सरकारी मकान हैं। सरकार ने यह भी बताया कि सरकारी बंगलों को दिवंगत नेताओं की स्मृति में स्मारक बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय के पत्र पर सरकारी आवासों में गैरकानूनी रूप से रहने के मामले में 18 जुलाई को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए थे। कोर्ट ने इस पत्र का स्वत: ही संज्ञान लिया था। राय ने कहा था कि 22 पूर्व मंत्री और सेवानिवृत्त नौकरशाह गैरकानूनी तरीके से सरकारी आवासों में रह रहे हैं।

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