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सज गया काठमांडू

लगभग 30 साल के हो चुके ‘सार्क’ संगठन के पास उपलब्धियों के नाम पर गिनाने को बहुत कुछ नहीं है। आमतौर पर इसे आठ निष्क्रिय देशों के क्लब के तौर पर देखा जाता रहा है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई महीने में सत्ता संभालने के बाद पड़ोसी मुल्कों में गहरी दिलचस्पी दिखाई, वरना तब तक तो यह संगठन किसी बीहड़ में गुम-सा हो गया लगता था। लेकिन, अपनी निष्क्रिय छवि के बावजूद काठमांडू में 26-27 नवंबर को होने जा रहे 18वें सार्क सम्मेलन ने नेपाली अधिकारियों को काठमांडू की सजावट के लिए प्रेरित किया है। पूरे काठमांडू में जगह-जगह सौर ऊर्जा से संचालित रोशनी की व्यवस्था की गई है, त्रिभूवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और मेहमानों के रुकने की जगहों के अलावा सभा स्थल को चमकाया जा रहा है, सड़कों के किनारे पौधे लगाए जा रहे हैं, आंखों को चुभने वाले होर्डिग्स को उतारा जा रहा है, यहां तक कि सरकार ने मुख्य सड़कों के किनारे स्थित निजी भवनों की रंगाई-पुताई के लिए भी धन मुहैया कराए हैं।

इन तैयारियों को लेकर लोग ट्विटर पर चुटकियां भी लेने लगे हैं। ट्विटर पर सक्रिय कुछ लोगों के मुताबिक, अब सड़कों के किनारे पके फलों से लदे सेब-संतरे के पेड़ लगाने भर की कमी रह गई है, जैसा कि राजशाही के दिनों में महाराज के इलाकाई दौरे के दौरान होता था। शहर की साज-सज्जा को लेकर जो एक और चुटकुला मशहूर हो रहा है, वह यह है कि इन तैयारियों को देखकर कहीं विदेशी मेहमान नेपाल को विकसित देश न मान लें। लेकिन शहर के संजीदा बाशिंदों का सुझाव है कि सार्क सम्मेलन के खत्म होने के बाद सरकारी मुलाजिम इन पौधों को पानी देना न भूलें। हालांकि, सरकारी प्रयासों को लेकर किए जा रहे मजाक समझे जा सकते हैं, मगर काठमांडू का यह बदलाव सचमुच सराहनीय है। जो इलाके अंधेरे में डूबे हुए थे, वे आज जगमगा रहे हैं। सौर ऊर्जा से सड़कों की लाइटें जल रही हैं। सरकार ने वादा किया है कि सम्मेलन की समाप्ति के बाद वह घाटी को भी रोशन करने के काम शुरू करेगी। अब समय आ गया है कि काठमांडू की सौंदर्यीकरण को सब अपना काम मानें।  
द काठमांडू पोस्ट, नेपाल

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