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फिल्म रिव्यू: द शौकीन्स

फिल्म रिव्यू: द शौकीन्स

अब दिल्ली हमारे लिए सेफ नहीं है। ये बात कौन कहेगा? जाहिर है दिल्ली में खुद को असुरक्षित महसूस करने वाली महिलाएं, और कौन! लेकिन जरा सोचिए कि यही बात अगर दिल्ली में रहने वाले साठ साल के बुजुर्ग कहने लगें तो..तो क्या होगा! ये जानने के लिए तीन ठरकी बुड्ढों पर आधारित फिल्म ‘द शौकीन्स’ देखनी होगी। ‘द शौकीन्स’ 1982 में आई बासु चटर्जी की फिल्म ‘शौकीन’ का रीमेक है, लेकिन ‘द शौकीन्स’ का मजा लेने के लिए आपको रीमेक का माइंडसेट घर छोड़ कर जाना होगा, वर्ना निराशा हाथ लगेगी।

ये कहानी है दिल्ली में रहने वाले तीन बुजुर्ग इंसानों की। पहले महाशय हैं लाली। इनके दिलफेंक मिजाज की बानगी देखिए। सुंदर युवतियों को छूने की चाहत के चलते इन्होंने अपनी दुकान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के सैंडल-चप्पल भी रखने शुरू कर दिये। दूसरे हैं, अपने पुरानी दिल्ली के मसाला किंग गोयल साहब यानी पिंकू। नाती-पोतों वाले हो गए, लेकिन अब भी टैंट-तंबू में बिकने वाली शिलाजीत खरीदते फिरते हैं। और इन दोनों के उस्ताद हैं मिस्टर केडी (अन्नू कपूर), जो हैं जुगाड़ नंबर वन। एक दिन केडी प्लान बनाता है कि युवतियों की ताड़म-ताड़ी बहुत हो गई। क्यों न बैंकाक चलें। ये बात जब पिंकू और लाली के घर वालों को पता चलती है तो रोना-पीटना मच जाता है। सबको पता है कि बैंकाक में क्या होगा।

खैर, किसी जुगाड़ से ये तीनों बैंकाक न जाकर मॉरिशस पहुंच जाते हैं, जहां इनकी मुलाकात एक ग्लैमरस लड़की अहाना (लीजा हेडन) से होती है। अहाना ठहरी सुपरस्टार अक्षय कुमार (अक्षय कुमार) की फैन। वो इन तीनों के सामने शर्त रख देती है कि जो कोई भी उसे अक्षय कुमार से मिलवाएगा, वो उसकी हर इच्छा पूरी करेगी। तो उधर, अक्षय कुमार को अब एक गंभीर अभिनेता बनना है, जिसके लिए वह जा पहुंचा है एक बंगभाषी निर्देशक की शरण में। जैसा मैंने शुरू में कहा कि इस फिल्म का मजा लेने के लिए आपको पुरानी फिल्म की तुलना से बचना होगा, क्योंकि एक बार जहां अक्षय के पैर पड़ गए, वहां कहानी का क्या हाल होता है, ये बताने की जरूरत नहीं है। ‘द शौकीन्स’ कई हिस्सों में अच्छी लगती है। मसलन लाली, पिंकू और केडी का अहाना को बीच पर चलने के लिए मनाने वाला सीन, अक्षय के शराबी वाले कुछेक सीन्स, अन्नू कपूर का पूरे प्रोग्राम को जुगाड़ बन कर लीड करना वगैरह वगैरह।

फिल्म में अक्षय कुमार ने अपने दिल की भड़ास निकाली है। टके-टके के एंडोर्समेंट, सितारों के नाज-नखरे आदि का चित्रण इस एक किरदार के जरिये किया गया है। यही वजह है कि इंटरवल के बाद तीन बुजुर्गों की कहानी को अक्षय का किरदार एक तरह से हाईजैक कर लेता है। मजा उसमें भी आता है, लेकिन सबसे ज्यादा एंटरटेन किया है अन्नू कपूर ने। ‘विक्की डोनर’ के बाद ये उनकी सबसे बढ़िया परफार्मेंस है। पंजाबी टोन लिए बुजुर्ग का किरदार उन पर फबता है। लीजा को लेकर अक्षय से मिलने जाने वाला अन्नू कपूर का सीन लाजवाब है, लेकिन अन्नू कपूर की ये परफॉर्मेंस पीयूष मिश्र और अनुपम खेर की जुगलबंदी के बिना अधूरी लगती। ये कहा जा सकता है कि इन तीन अनुभवी कलाकारों के साथ लीजा ने तालमेल बैठा लिया है। लीजा के किरदार को वैसे भी किसी ‘अभिनय’ की दरकार नहीं थी। ‘द शौकीन्स’ एक टाइम पास फिल्म से ज्यादा नहीं है, लेकिन शौक-शौक में अगर टाइम पास हो जाए तो क्या बुरा है। ये फिल्म  यही बताती है।

कलाकार: अक्षय कुमार, लीजा हेडन, अनुपम खेर, अन्नू कपूर, पियूष मिश्र, रति अग्निहोत्री, सुब्रत दत्ता
निर्देशक: अभिषेक शर्मा
निर्माता: मुराद खेतानी, अश्विनी वर्दे
कहानी-पटकथा-संवाद: तिग्मांशु धूलिया, साईं कबीर
संगीत: हनी सिंह, हार्ड कौर, डीजे नटोरियस, आर्को मुखर्जी,
गीत: शब्बीर अहमद, सिद्धार्थ बैनर्जी

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