DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फिल्म रिव्यू: रंग रसिया

फिल्म रिव्यू: रंग रसिया

अपने देश में क्रिकेट को धर्म के समान और उसके सबसे बढ़िया-चहेते खिलाड़ी को भगवान का दर्जा दिया जाता है। पर जिस व्यक्ति ने भगवान को मूरत से निकाल कर चित्रों की शक्ल दी, उसे आप क्या दर्जा देना चाहेंगे! उस इंसान को त्रावणकोर के राजा ने राजा की उपाधि से नवाजा था, लेकिन बाद में उसी व्यक्ति पर धर्म को भ्रष्ट करने का आरोप लगाया गया। मिलिए देश के महान चित्रकार राजा रवि वर्मा से। और केतन मेहता की लंबे समय से अटकी पड़ी फिल्म ‘रंग रसिया’ के जरिये जानिए देश के एक महान चित्रकार के जीवन के अनेक रंगों के बारे में।

चित्रकारी राजा रवि वर्मा (रणदीप हुड्डा) की रग-रग में थी, लेकिन उसे कैनवस पर सही दिशा मिली एक अछूत कन्या (राशना शाह) की पेंटिंग बना कर, जिसके साथ पहले उन्होंने रास किया। रवि वर्मा की प्रसिद्धि जब त्रावणकोर के राजा (आशीष विद्यार्थी) तक पहुंची तो उन्होंने उसे राजा के सम्मान से नवाजा, लेकिन कला के दुश्मनों की उस दौर में भी कमी नहीं थी। राजा के न रहने के बाद रवि वर्मा को मुंबई आना पड़ा, जहां उनकी नजर एक दिन सुगंधा (नंदना सेन) पर पड़ी। रवि वर्मा उसे देखते ही मुग्ध हो गए और उसके चित्र बनाने लगे।

इसी दौरान उन्हें बड़ौदा के राजा (सचिन धर्माधिकारी) ने अपने राज महल के लिए कुछ अच्छे चित्र बनाने का न्यौता दिया, लेकिन रवि वर्मा भारतीय और यूरोपियन कला के समन्वय से, चित्रों के माध्यम से देश की महान गाथाएं जन-जन तक पहुंचाना चाहते थे। ये बात कुछ धर्म गुरुओं (दर्शन जरीवाला और अन्य) को हजम नहीं होती। इन सब बातों से दूर रवि वर्मा एक अंग्रेज (जिम बोइवन) के साथ मिल कर प्रेस लगाते हैं और देवी-देवताओं के चित्र छापने लगते हैं। ऐसे ही कुछ चित्रों पर जब सुगंधा को पहचान लिया जाता है तो हंगामा मच जाता है, क्योंकि सुगंधा एक वेश्या है।

केतन मेहता की गिनती उन निर्देशकों में की जाती रही है, जो अपने विषय के साथ समझौता नहीं करते और अपने कलाकारों से जम कर काम लेते हैं। आमिर खान की ‘मंगल पांडे’ के बाद ‘रंग रसिया’ इसका ताजा उदाहरण है। इस फिल्म से उन्होंने रणदीप हुड्डा पर लगे एंटी हीरो के टैग को हटाने का काम किया है। साथ ही एक ऐसे चित्रकार के बारे में विस्तृत जानकारी दी है, जिसके बारे में लोगों के बहुत कम पता है। एक खास वर्ग को छोड़ दें तो राजा रवि वर्मा के बारे में पहले कभी इतनी बात नहीं की गई। ये सब जानते हैं कि ये फिल्म लंबे समय से रिलीज की बाट जोह रही थी, जिसके कई कारण थे, लेकिन आज लगता है कि ये फिल्म सही समय पर रिलीज हुई। अगर ये
6-7 साल पहले रिलीज हुई होती तो शायद ऐसा विषय लोगों को हजम नहीं होता। फिल्म कहानी के लिहाज से काफी बोल्ड है। इसे ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला है, जिसकी वजह है नंदना सेन और रणदीप हुड्डा के न्यूड सीन्स।

फिल्म की खासियत है इसकी सूक्ष्मता। निर्देशक ने इसमें बहुत बारीक चीजों को पर्दे पर उकेरा है। एक चित्रकार की मनोदशा के साथ-साथ उसके संघर्ष, तेज, साजिश, प्रेम आदि को भी अच्छे ढंग से समेटा है। अभिनय की दृष्टि से देखें तो ये रणदीप हुड्डा की अब तक की सबसे बढ़िया परफॉर्मेंस है। उन्होंने पूरी कोशिश की है कि जिस रूप में लोग उन्हें अब तक देखते आए हैं, उससे वे अलग दिखें। इसमें वह सफल भी रहे हैं। नंदना सेन अच्छी हैं, लेकिन संवाद अदायगी में फिरंग भाव उन पर हावी दिखाई देता है। ये फिल्म एक ऐसे इंसान के बारे में है, जो आम से खास बना और जिसने आम इंसानों के लिए सबसे खास यानी भगवान को चित्र का रूप दिया। एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव के लिए ये फिल्म जरूर देखें।

कलाकार: रणदीप हुड्डा, नंदना सेन, विक्रम गोखले, परेश रावल, सचिन खेड़ेकर, सचिन धर्माधिकारी, सुहासिनी मुले, दर्शन जरीवाला, जिम बोइवन, चिराग वोहरा
निर्देशक: केतन मेहता
निर्माता: आनंद महेन्द्रू, दीपा साही
कहानी-पटकथा-संवाद: केतन मेहता, संजीव दत्ता

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फिल्म रिव्यू: रंग रसिया