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भूटान नरेश ने प्रोटोकाल तोड़कर की प्रणव मुखर्जी की अगवानी

भूटान नरेश ने प्रोटोकाल तोड़कर की प्रणव मुखर्जी की अगवानी

भूटान नरेश तथा उनकी पत्नी ने प्रोटोकाल से हटकर हवाई अड्डे पर आकर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की अगवानी की जो दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को थिम्पू पहुंचे हैं। पिछले 26 सालों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली भूटान यात्रा है।

भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और उनकी पत्नी विशेष सौहार्द और सम्मान का परिचय देते हुए मुखर्जी की अगवानी करने के लिए पारो हवाई अड्डे पर पहुंचे जो अपने आप में अभूतपूर्व था। इसके बाद राष्ट्रपति मुखर्जी सड़क मार्ग से करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय कर थिम्पू पहुंचे जहां रास्ते में सैंकड़ों स्कूली बच्चे मार्ग के दोनों ओर हाथों में भारतीय और भूटानी राष्ट्रीय ध्वज लिए खड़े थे।

थिम्पू के उत्तरी छोर पर स्थित भूटान की सिविल सरकार के प्रमुख की गद्दी तथा बौद्ध मठ त्शिछोदेजोंग में मुखर्जी को पारंपरिक रूप से सलामी गारद पेश किया गया। सलामी गारद से पूर्व पारंपरिक छिपड्रेल जुलूस का आयोजन किया गया। इस जुलूस का आयोजन भूटान नरेश द्वारा विशेष रूप से उनके देश की यात्रा पर आने वाले राष्ट्रप्रमुखों के लिए किया जाता है।

भूटान में ऐसा माना जाता है कि पारंपरिक रीति रिवाज देश के लिए शुभ होते हैं और इससे पड़ोसियों के साथ संबंध अच्छे रहते हैं। राष्ट्रपति मुखर्जी और भूटान नरेश जिग्मे ने बाद में द्विपक्षीय वार्ता की और उसके बाद दोनों नेताओं के फोटोग्राफ लिए गए। फोटोग्राफ लिए जाने के दौरान भूटान नरेश के पिता जिग्मे सिंग्ये वांगचुक भी मौजूद थे।

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