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ऐसे करें सामना अपने पांच दुश्मनों का

ऐसे करें सामना अपने पांच दुश्मनों का

अच्छा जीवन जीना है तो स्वस्थ रहना जरूरी है। पर अमूमन महिलाओं के पास अपने स्वास्थ्य के लिए या अपने लिए वक्त ही नहीं होता। यही वजह है कि कुछ बीमारियां अपना सबसे ज्यादा शिकार महिलाओं को ही बनाती हैं। इनसे अगर बचना है तो कुछ सावधानी बरतनी ही होगी।

अक्सर महिलाएं जितना ध्यान अपने परिवार का रखती हैं, उतना ध्यान अपना नहीं रखतीं। घरेलू महिलाओं की बात करें तो पूरे घर में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज वही करती हैं। जिम जाने या व्यायाम करने का सवाल ही कोसों दूर है। उन्हें अपने बच्चों व पति की पसंद का खाना पकाना तो पसंद है, लेकिन अपनी पसंद-नापसंद को वे प्राय: अनदेखा ही करती हैं। ऐसे में वे अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाती हैं। खानपान की खराब आदतें, अधिक कामकाज और अपने प्रति लापरवाही कब महिलाओं को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल देते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। हमने ऐसी पांच बीमारियों और उनसे बचाव के उपाय को एकत्रित करने की कोशिश की है, जो सबसे ज्यादा महिलाओं को अपना शिकार बनाती हैं।

माइग्रेन
अक्सर महिलाएं सिरदर्द की शिकायत करती हैं। लेकिन कभी कोई पेनकिलर तो कभी कोई बाम लगा कर वे दर्द के कारण को दरकिनार कर देती हैं। दर्द ठीक तो हो जाता है, पर कुछ समय बाद फिर होने लगता है। कभी-कभी तो सर के किसी एक खास भाग में ही बार-बार दर्द उठता है। दरअसल यह सब माइग्रेन के शुरुआती लक्षण हैं। माइग्रेन ऐसी बीमारी है, जिससे महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। आर्टिमिस हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट और एचओडी प्रवीण गुप्ता बताते हैं, ‘प्रत्येक पांच में से एक महिला उम्र के किसी न किसी पड़ाव पर माइग्रेन की शिकार हो ही जाती है।’

माइग्रेन एक प्रकार का सिर दर्द है, जिसमें उल्टी का एहसास भी होता है। माइग्रेन से पीडित महिलाओं के सिर के एक तिहाई हिस्से में लगातार दर्द होता है। यह दर्द चार से लेकर 72 घंटे तक रह सकता है। अध्ययनों के अनुसार, भारत में 25 प्रतिशत महिलाएं और 8 प्रतिशत पुरुष इसकी चपेट में हैं। इनमें से आधे लोग 20 वर्ष से कम उम्र में ही पहली बार माइग्रेन के शिकार हो जाते हैं और 98 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को यह बीमारी 50 साल की उम्र के पहले अपनी चपेट में ले लेती है। 

बचाव के उपाय
समय पर भोजन करें।
तनाव को दूर रखें।
नींद पूरी लें।
व्यायाम आदि से खुद को फिट रखें।

स्तन कैंसर
हमारे देश में स्तन कैंसर से पीडित महिलाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसका कारण जागरूकता में कमी और बदलती जीवनशैली है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, हर 22 में से एक महिला स्तन कैंसर का शिकार होती है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ ऑनकोलॉजिस्ट डॉक्टर सितालकर के अनुसार, ‘महिलाएं अधिक जागरूक और प्रोफेशनल हुई हैं, लेकिन दूसरी ओर वे स्वयं के प्रति लापरवाही भी बरतती हैं। देर से शादी होना, बच्चे होना और फिर बच्चों को स्तनपान न कराना ही इस समस्या का प्रमुख कारण है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली के कारण बच्चियों में मासिक धर्म जल्दी आरंभ हो रहा है और इसके समाप्त होने की उम्र में भी इजाफा हुआ है। इस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव काफी हद तक ब्रेस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं।

स्तन कैंसर महिलाओं के मृत्यु कारणों में लंग कैंसर के बाद दूसरे स्थान पर आता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे देश में महिलाएं झिझक के कारण डॉक्टर के पास जाने में हिचकिचाती हैं, जिस कारण आरंभिक स्तर पर इस कैंसर से बचाव नहीं हो पाता। इसमें स्तन में गांठ बन जाती है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है। यदि शुरुआती दौर में इसका पता चल जाए तो इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज संभव है।

हृदय रोग
अमूमन यह माना जाता है कि हृदय रोग से पुरुष ही अधिक पीडित होते हैं, लेकिन अब यह धारणा धीरे-धीरे बदल रही है। अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट के.के. कपूर का कहना है, ‘पिछले सालों में कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय रोग के मामले सामने आए हैं। इसका कारण वर्कलोड, तनाव, फैमिली हिस्ट्री, खराब खानपान आदि है। ज्यादातर महिलाएं पहले डायबिटीज आदि से पीडित होती हैं और फिर उन्हें हृदय रोग की समस्या हो जाती है। हाइपरटेंशन, उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप भी इसके प्रमुख कारण हैं।’

बचाव के उपाय
खानपान में फास्टफूड की मात्रा कम करें।
रेगुलर चेकअप कराएं, जिसमें शुगर, कोलेस्ट्रॉल आदि का लेवल चेक करवाना न भूलें।
तनाव न लें।
व्यायाम करें या मार्निग और ईवनिंग वॉक करें।

ऑस्टियोपोरोसिस
यह हड्डी से संबंधित रोग है। इसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। मेदांता हॉस्पिटल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉंक्टर सुशीला कटारिया के अनुसार, ‘ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं को होती है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं में कमर दर्द, शरीर दर्द आदि की समस्या इसी से मिलता-जुलता स्वरूप है। इसका प्रमुख कारण यह है कि महिलाएं कैल्शियम, विटामिन डी को अपने भोजन में पर्याप्त मात्रा में नहीं लेतीं। मासिक धर्म के कारण महिलाओं के शरीर से काफी पोषक तत्व निकल जाते हैं, इसलिए उन्हें अपनी सेहत का अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है।’

बचाव के उपाय
कैल्शियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में लें।
प्रोटीनयुक्त भोजन करें।
व्यायाम करें और प्रतिदिन वॉक अवश्य करें।

अवसाद
तनाव और अवसाद के बीच मामूली सा फर्क है। महिलाएं इसलिए अक्सर अवसाद का शिकार  हो जाती हैं, क्योंकि वे जल्द तनावग्रस्त हो जाती हैं। मेंटल हेल्थ कार्यक्रम चलाने वाली और दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर तूलिका वाधवा बताती हैं, ‘महिलाएं हमारे समाज में एक साथ कई रोल निभाती हैं। ऐसे में तनाव और फिर अवसाद की शिकार होना आम सी बात है। साथ ही एक प्रमुख समस्या होती है अपनी मन की बातों को जाहिर न करना। हमारे समाज में प्राय: महिलाएं अपने परिवार आदि से संबंधित बातों को शेयर नहीं करतीं। इस कारण उन्हें एक बात कई दिनों, हफ्तों और महीनों तक परेशान करती रहती है।’

बचाव के उपाय
अपने मन की बात को दोस्तों से शेयर करें।
अपनी हॉबी का काम अवश्य करें।
बातों को मन से न लगाएं।
परिस्थितियों को समझ कर जल्द निर्णय लें।

बचाव के उपाय

खानपान नियंत्रित करें। फास्ट फूड से बचें। अच्छा खाएं और कैलोरी को कंट्रोल में रखें।
बच्चे को स्तनपान कराएं।
हर माह स्वयं ही स्तन की जांच करें और देखें कि उसमें कोई गांठ तो नहीं है।
35 वर्ष के बाद दो या तीन साल में एक बार मेमोग्राफी टैस्ट अवश्य करवाएं।

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