DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लैंगिक भेदभाव से लड़ने में पुरुषों का सहयोग जरूरी

लैंगिक भेदभाव से लड़ने में पुरुषों का सहयोग जरूरी

संयुक्त राष्ट्र की महिला सशक्तिकरण संस्था की प्रमुख ने कहा है कि भारत में महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न और भेदभाव से लड़ने के लिए पुरुषों को इस लड़ाई में शामिल करना जरूरी है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लैंगिक भेदभाव की कमर तोड़ने के अंतिम पड़ाव से गुजरने के लिए भारत का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र की महिला कार्यकारी निदेशक पी एमलेंबो-एनग्शुका ने कहा कि हमें लैंगिक समानता के समर्थन के आधार को विस्तार देने की जरूरत है। महिलाओं ने इसमें अपनी पूरी क्षमता लगा दी है। जरूरत इस बात की है कि पुरुषों का एक आंदोलन खड़ा करने के लिए पुरुष जिम्मेदारी उठाएं। उन्हें खुद को एक संगठित आंदोलन के रूप में तैयार करना चाहिए। हम चाहते हैं कि पुरुष जिम्मेदारी उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि हम महिलाओं के खिलाफ चल रही इन कुप्रथाओं का अंत करेंगे।

लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित संयुक्त राष्ट्र की संस्था प्रमुख होने के नाते एमलैंबो की पहली भारत यात्रा शनिवार को शुरू हो रही है। 11 नवंबर तक चलने वाली अपनी इस यात्रा के दौरान वह नई दिल्ली और मुंबई जाएंगी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी एवं लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन से मुलाकात करेंगी।

अपनी यात्रा को रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए एमलैंबो ने एक साक्षात्कार में बताया कि यदि भारत लैंगिक समानता हासिल करने एवं महिलाओं के खिलाफ भेदभाव मिटाने में सफलता हासिल कर सकता है तो वह विश्व के दूसरे देशों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

उन्होंने कहा कि यूएन वूमन संस्था 2015-2030 की अवधि को लैंगिक भेदभाव की कमर तोड़ने की दिशा में अंतिम मील मानती है और इस अंतिम मील को हम भारत के बिना नहीं चल सकते।

एमलैंबो नई दिल्ली में मैन अंगेज सिंपोजियम (पुरुष भागीदारी गोष्ठी) में शिरकत करेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में पुरुषों और लड़कों को छोटी उम्र से ही शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए महिलाओं और सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।

पुरुषों और लड़कों, संसद के सदस्यों, धार्मिक अधिकारियों और मीडिया की पहचान की जानी चाहिए और लैंगिक असमानता से निपटने के लिए उन्हें अपने साथ लिया जाना चाहिए। एमलैंबो ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं एवं लड़कियों को देश की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक बताया जाना एक महत्वपूर्ण संकेत है। सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा समझ हो।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मोदी सरकार यह करे। सरकार की ओर से कही गई बातें हमारे लिए प्रोत्साहक हैं और हम वहां यह संदेश देने जा रहे हैं कि कृपया इस लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध रहें। यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्या आप सोच सकते हैं कि यदि हम भारत में लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण के इस लक्ष्य को हासिल कर लेते हैं, तो यह विश्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूएन वूमन संस्था लंबे समय से भारत के साथ है।
    
उन्होंने शांतिरक्षक अभियानों में भारत की ओर से महिला सैन्य दलों समेत सैनिक भेजने के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पास स्वाभाविक रूप से एक नेतृत्वकारी भूमिका है। इसलिए भारत की सफलता की कहानियों को वास्तव में समर्थन करने से यूएन वूमन को बहुत लाभ है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:लैंगिक भेदभाव से लड़ने में पुरुषों का सहयोग जरूरी